रायगढ़: राज्य शासन एवं जिला प्रशासन की अभिनव पहल के तहत रायगढ़ जिले की सभी 550 ग्राम पंचायतों में आज ‘रोजगार सह आवास दिवस’ का व्यापक और प्रभावशाली आयोजन किया गया। इस एक दिवसीय कार्यक्रम ने ग्रामीण विकास को तकनीक, पारदर्शिता और जनभागीदारी से जोड़ते हुए शासन-प्रशासन और आम नागरिकों के बीच की दूरी को काफी हद तक कम किया।
कार्यक्रम के दौरान पंचायत स्तर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी देखने को मिली। 9 हजार से अधिक ग्रामीणों ने सक्रिय सहभागिता निभाई और डिजिटल माध्यमों से अपने-अपने गांव के विकास कार्यों की जानकारी सीधे मोबाइल पर प्राप्त की।
QR कोड से गांव का विकास हुआ पारदर्शी
आयोजन का मुख्य आकर्षण डिजिटल सुशासन रहा। पंचायत परिसरों में उपलब्ध कराए गए QR कोड को स्कैन करते ही ग्रामीणों के मोबाइल पर उनके गांव की ‘एट ए ग्लांस रिपोर्ट’ खुल गई।
इस रिपोर्ट में पिछले पांच वर्षों में मनरेगा के तहत किए गए कार्यों, साथ ही विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण योजना से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई गई। अपने गांव के विकास कार्यों को मोबाइल स्क्रीन पर देखकर ग्रामीणों में उत्साह और विश्वास का माहौल नजर आया।
आजीविका डबरी से बढ़ेंगे आय के अवसर
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से डबरी निर्माण के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि डबरी के माध्यम से जल संरक्षण, कृषि सिंचाई और मछली पालन को बढ़ावा देकर ग्रामीण परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि संभव है।
इसके साथ ही विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए पम्पलेट वितरण किया गया, ताकि प्रत्येक ग्रामीण तक योजनाओं की जानकारी पहुंच सके।
आवास और मनरेगा से जुड़े मुद्दों का मौके पर समाधान
‘रोजगार सह आवास दिवस’ के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा से जुड़ी जमीनी समस्याओं पर सीधा संवाद किया गया। इसमें आवास निर्माण की किस्तों का भुगतान, प्रधानमंत्री आवास के साथ मिलने वाली 90 दिवस की मनरेगा मजदूरी, निर्माण सामग्री की उपलब्धता और गुणवत्ता जैसे विषयों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए।
ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि समय पर आवास पूर्णता के लिए मनरेगा मजदूरी का भुगतान उनका अधिकार है, जिसे सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
प्रशासन ने जताई प्रतिबद्धता
इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिजीत पठारे ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य विकास की सभी कड़ियों को आपस में जोड़ना है। उन्होंने बताया कि एक ओर पक्के आवास के माध्यम से लोगों को सिर पर छत दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर आजीविका डबरी और वीबीजीआरएमजी के जरिए रोजगार और आजीविका की स्थायी गारंटी दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह समन्वित विकास मॉडल रायगढ़ जिले को डिजिटल, आत्मनिर्भर और सशक्त ग्रामीण विकास की दिशा में एक नई पहचान दिला रहा है।
Author: Deepak Mittal









