बालोद।जब सेवा को सम्मान, संवेदना और समर्पण के साथ किया जाए, तब वह समाज के लिए मिसाल बन जाती है। न्यू बस स्टैंड, बालोद निवासी श्रीमती ललिता कौमार्य ने इसी सोच को अपना जीवन लक्ष्य बनाया है। सेवा सम्मान वेलफेयर सोसायटी, बालोद की पंजीयन संस्था संचालिका ललिता कौमार्य आज मानव सेवा के क्षेत्र में एक सशक्त और प्रेरणादायी नाम बन चुकी हैं।
ललिता कौमार्य के नेतृत्व में सेवा सम्मान वेलफेयर सोसायटी द्वारा असहाय बुजुर्गों, बीमार महिला-पुरुषों, दिव्यांगजनों तथा 0 से 8 वर्ष तक के बच्चों के लिए घर-पहुंच देखभाल सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उनकी संस्था के माध्यम से प्रशिक्षित आया, बाई, नर्स, जापा मेड, बेबी केयर और वार्ड बॉय की 24×7 सेवाएं लोगों को राहत और भरोसा दे रही हैं।
मरीजों को नहलाना, कपड़े बदलवाना, समय पर दवाइयाँ देना, मालिश कराना, एक्सरसाइज़ करवाना, बिस्तर व कमरे की साफ-सफाई रखना, व्हीलचेयर अथवा घर पर चलने में सहायता देना—ये सभी कार्य ललिता कौमार्य की संस्था द्वारा पूरी जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना के साथ किए जाते हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि सेवा में सबसे ज़रूरी है मरीज का आत्मसम्मान।
ललिता कौमार्य की सेवा भावना का असर उन चेहरों पर साफ़ दिखता है, जहाँ कभी लाचारी थी और आज सुकून है। बुजुर्गों के लिए वे सहारा बनी हैं, बीमारों के लिए उम्मीद और बच्चों के लिए सुरक्षित देखभाल की प्रतीक हैं।
आज ललिता कौमार्य का नाम बालोद जिले में ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में भरोसे और निष्कलंक सेवा का प्रतीक बनता जा रहा है। सेवा सम्मान वेलफेयर सोसायटी के माध्यम से वे लगातार समाज के अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुँचाने का कार्य कर रही हैं।
निस्संदेह, ललिता कौमार्य जैसी समाजसेविका यह साबित करती हैं कि जब नीयत साफ़ हो और उद्देश्य सेवा हो, तो इंसान समाज में बदलाव ला सकता है।
Author: Deepak Mittal









