कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ 272 से अधिक पूर्व नौकरशाहों, न्यायाधीशों और सैन्य अधिकारियों द्वारा लिखे गए पत्र पर कांग्रेस ने कड़ा एतराज जताया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने गुरुवार को इस पत्र की आलोचना करते हुए कहा कि पहले भाजपा और अब रिटायर्ड अधिकारी चुनाव आयोग का बचाव करने मैदान में उतर आए हैं।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 16 पूर्व न्यायाधीशों, 123 पूर्व नौकरशाहों, 14 राजदूतों और 133 रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों सहित कुल 272 प्रमुख हस्तियों ने एक पत्र जारी कर राहुल गांधी की ओर से लगातार चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर किए जा रहे हमलों की निंदा की है।
पत्र में कहा गया है कि राहुल गांधी “वास्तविक नीतिगत विकल्प” देने के बजाय “निराधार आरोपों” का सहारा ले रहे हैं और इससे संस्थाओं की विश्वसनीयता पर चोट पहुँच रही है।
पवन खेड़ा का पलटवार — “सवाल पूछना हमला नहीं”
न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत में पवन खेड़ा ने इस पत्र को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा—
“जब पूरा विपक्ष चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रहा है, तब सबसे पहले भाजपा उसके बचाव में आई। अब रिटायर्ड अधिकारी बचाव करने लगे हैं। सवाल पूछने से लोकतंत्र मजबूत होता है, कमजोर नहीं।”
खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि पीएम ऐसी “मानसिकता” को बढ़ावा दे रहे हैं जहाँ सवाल पूछना ही हमला माना जा रहा है।
उन्होंने कहा—
“क्या लोकतंत्र को बचाने के लिए सवाल पूछना जरूरी नहीं है? क्या ये लोग अपने जीवनकाल में लोकतंत्र को मरते हुए देखना चाहते हैं? आँख, कान और मुँह बंद करने से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता।”
पत्र में क्या लिखा गया?
पूर्व अधिकारियों द्वारा जारी पत्र में कहा गया है—
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राहुल गांधी संवैधानिक संस्थाओं, खासकर चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा पर “व्यवस्थित और षड्यंत्रकारी हमला” कर रहे हैं।
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इससे लोकतंत्र की नींव कमजोर पड़ती है।
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पहले भी कांग्रेस नेताओं ने सशस्त्र बलों की वीरता और न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, जो अस्वीकार्य है।
राजनीतिक तापमान और बढ़ा
इस पत्र के सामने आने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है। जहां भाजपा इस पत्र को “जनभावनाओं की आवाज़” बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे “स्क्रिप्टेड डिफेंस” करार दे रही है।
चुनाव आयोग पर राहुल गांधी के सवाल और अब इस पत्र की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल को और गरमा सकती है।
Author: Deepak Mittal










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