दल्लीराजहरा,,खनिज नगरी दल्ली राजहरा में रविवार की तड़के 3 बजे से हो रही मूसलधार बारिश ने शहर की पूरी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। वार्ड क्रमांक 04, 10, 11, 12, 13, 15, 20, 22, 23, 24, सब्ज़ी मार्केट और चिखलाकसा के निचले दफाई क्षेत्रों में हालात बाढ़ जैसे बन गए। झरनों की नगरी कहे जाने वाला दल्लीराजहरा पूरा का पूरा जलमग्न हो गया। नालों का पानी घरों में घुस गया, सड़कें तालाब बन गईं, और गरीब जनता तड़पती रही।
इसी बीच, प्रशासन और जनप्रतिनिधि पौधारोपण के फोटोशूट में व्यस्त रहे। “एक पेड़ मां के नाम” जैसे नारों के बीच जबरदस्त प्रचार-प्रसार किया गया, लेकिन उन्हीं पेड़ों की छांव में बैठे अधिकारी जनता की चीख नहीं सुन सके। हर साल की तरह इस बार भी पौधे लगाकर कैमरे के सामने मुस्कुराने का कार्यक्रम चला, जबकि दूसरी ओर शहर की जनता की आंखों में आंसू और घरों में पानी भरा रहा।
बारिश की पूर्व चेतावनी के बावजूद नालों की सफाई नहीं करवाई गई। जल निकासी के इंतजाम नाकाफी थे और नतीजा यह हुआ कि दल्ली राजहरा की सड़कों पर गंदा पानी बहता रहा, मवेशी बह गए, दुकानों में कीचड़ भर गया और घरों का सामान बर्बाद हो गया।
प्रशासन के जिम्मेदार चेहरे सिर्फ समारोहों में दिखे, राहत कार्यों में नहीं।
जनता का सवाल सीधा है – क्या प्रशासन सिर्फ पौधे लगाने और फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गया है? जब जनता को मदद चाहिए, तब अफसर और नेता कहां छिप जाते हैं?
इस आपदा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि योजनाएं सिर्फ कागज़ों पर चल रही हैं, ज़मीनी हकीकत में जनता को सिर्फ गंदगी ही मिल रही है,,!
Author: Deepak Mittal









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