बालोद, छत्तीसगढ़।
जिले से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां स्थानीय निवासी आशीष गोलछा ने बालोद के धीरज शर्मा और पुलिसकर्मियों पर मिलीभगत कर जबरन इकरारनामा लिखवाने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने इस संबंध में थाना बालोद में विधिवत शिकायत दर्ज कराई है और न्याय की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता आशीष गोलछा के अनुसार, धीरज शर्मा द्वारा पुराने चेक बाउंस केस का हवाला देते हुए उन्हें गोंदिया ले जाया गया। इस दौरान दो पुलिसकर्मी और धीरज शर्मा एक निजी वाहन में पहुंचे और जबरन उन्हें हिरासत में लिया। यह सब उस वक्त हुआ जब आशीष गोंदिया स्थित एक प्रतिष्ठान में कार्यरत थे।
गोलछा का आरोप है कि गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया, और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर मनमानी शर्तों के साथ एक इकरारनामा तैयार करवा कर उस पर जबरदस्ती हस्ताक्षर करवा लिए गए।
न्यायपालिका की अवहेलना का आरोप
पीड़ित का दावा है कि उन्हें यह कहकर बहलाया गया कि इकरारनामा साइन करने के बाद उन्हें छोड़ दिया जाएगा, लेकिन इसके विपरीत, उन्हें बालोद वापस ले जाया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान न तो उन्हें परिजनों से संपर्क करने दिया गया, न ही मोबाइल रखने की अनुमति दी गई।
इतना ही नहीं, रास्ते में राजनांदगांव के एक होटल में नाश्ते के बहाने गाड़ी रुकवाकर मीडिया को बुलाया गया और पूरा मामला प्रेस में लीक कर दिया गया, जिससे उनकी छवि को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया।
न्याय की मांग और विश्वास
आशीष गोलछा ने इस घटना को “कानून की खुली अवहेलना” बताते हुए इसे “मानसिक उत्पीड़न” करार दिया है। उन्होंने मांग की है कि:
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जबरन लिखवाए गए इकरारनामा को विधिक रूप से निरस्त किया जाए।
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धीरज शर्मा और संबंधित पुलिसकर्मियों पर उचित विधिक कार्रवाई हो।
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गिरफ्तारी की प्रक्रिया को कानूनी जांच के तहत परखा जाए।
आशीष ने कहा, “मुझे भारत की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। मैं चाहता हूँ कि न्याय और सच की आवाज बुलंद हो।”
Author: Deepak Mittal








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