जे के मिश्र
जिला ब्यूरो चीफ
नवभारत टाइम्स24*7in बिलासपुर
बिलासपुर। जिले में जल संकट को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल द्वारा अवैध बोर खनन पर सख्त निर्देश दिए जाने के बाद प्रशासन सक्रिय नजर आ रहा है।
एक अवैध बोरिंग मशीन को जब्त कर सरकंडा थाना परिसर में खड़ा किया गया। लेकिन जिस तरह से इस कार्रवाई को गोपनीय रखा गया और नायब तहसीलदार राहुल शर्मा मीडिया के सवालों से कन्नी काटते रहे, उससे सवाल उठने लगे हैं।
बताया गया कि कलेक्टर अग्रवाल ने कुछ दिन पहले बोर मशीन ऑपरेटरों की बैठक लेकर उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी क्षेत्र में बोरिंग कार्य शुरू करने से पहले विभागीय अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के बोरिंग कराने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी बीच करीब 1 बजे खमतराई क्षेत्र के खसरा नंबर 733/13 में बिना स्वीकृति बोर खनन करते हुए पाए गए एक वाहन को ज़ब्त कर सरकंडा थाने लाया गया।
जब्त वाहन पर “आर. डी. बोर वेल्स” अंकित है और इसका रजिस्ट्रेशन नंबर CG-10-X-1312 बताया गया है। इस कार्रवाई के निर्देश नायब तहसीलदार राहुल शर्मा ने दिए थे, जिसकी पुष्टि मौके पर मौजूद पटवारी रमेश वैष्णव ने की। उन्होंने बताया कि पंचनामा बनाकर पुलिस बल की सहायता से वाहन को थाने खड़ा किया गया।
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि नायब तहसीलदार राहुल शर्मा इस पूरी कार्रवाई पर मीडिया से बात करने से बचते रहे। शुक्रवार को जब उनके कार्यालय में उनसे मिलने का प्रयास किया गया तो बताया गया कि वे बाहर हैं। लेकिन वे कार्यालय से नदारद रहे और कॉल पर भी जवाब नहीं दिया। यह रवैया संदेह को जन्म देता है कि आखिर एक प्रशासनिक अधिकारी, जो जनहित में कार्रवाई कर रहा है, वह जानकारी साझा करने से क्यों कतरा रहा है?
जनता के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब अवैध कार्य के विरुद्ध कार्रवाई हुई है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की उम्मीद रखने वाली जनता और मीडिया को जानकारी से वंचित रखना कहीं न कहीं अधिकारी की मंशा पर सवाल उठाता है।
अब देखना यह है कि प्रशासनिक स्तर पर ऐसी कार्रवाई को लेकर भविष्य में कितनी पारदर्शिता बरती जाएगी और अधिकारी जनसंचार से कितना जुड़ने को तैयार होंगे।
Author: Deepak Mittal









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