करवाचौथ विशेष:नही दिखा जिले में चांद, वीडियो कॉल बना सहारा…..

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निर्मल अग्रवाल ब्यूरो प्रमुख मुंगेली

सरगांव-करवा चौथ त्यौहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी (करक चतुर्थी) को मनाया जाता है। इस पर्व पर विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य एवं अपने अखण्ड सौभाग्य हेतु निराहार रहकर चन्द्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं और चन्द्र उदय उपरांत चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर भोजन करती हैं।

चन्द्र दर्शन पश्चात अर्ध्य देकर उपवास समाप्त माना जाता है ऐसी परम्परा चली आ रही है। किंतु इस वर्ष का करवा चौथ त्यौहार कुछ अलग ही रहा जो निश्चय ही यादगार बन गया। दिन भर के उपवास बाद निर्धारित चन्द्र उदय के समय से सुहागिन महिलाओं ने चांद का रास्ता ताकना आरम्भ कर दिया था लेकिन मौसम की करवट और छाए बादलों ने चांद को अपने आगोश में ले लिया नतीजन छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में चांद के दर्शन दुर्लभ हो गए।

चाँद न दिखने की बनती स्थिति और 8 से 9 फिर 10 और 11 बजे तक भी स्थिति स्पस्ट न होते देख महिलाओं में छटपटाहट और बेचैनी के साथ असमंजस की स्थिति निर्मित होने लगीं की अब कैसे और क्या होगा।

लेकिन आधुनिकीकरण में हर समस्या का हल विद्यमान है अन्य क्षेत्रों दिल्ली, रायपुर, राजनांदगांव, जांजगीर, आदि से चंद्रोदय की तसवीर और जानकारी मिलते ही लोगो ने तुरंत एक नया तरीका ईजाद किया और इन जगहों पे रहने वाले अपने परिचितों को वीडियो कॉल के माध्यम से चाँद के दर्शन कर अर्ध्य देते हुए करवा चौथ का व्रत पूर्ण किया।

*दिल्ली दिलवालों की*

एक तरफ जंहा सभी अपने परिचितों को वीडियो कॉल कर अपना उपवास पूर्ण कर रहे थे वंही कुछ लोग ऐसे भी थे जिनके कोई परिचित ऐसी जगह नही थे ऐसे में नगर पंचायत सरगांव के युवा श्रीराम साहू जो कि अडानी ग्रुप दिल्ली में मैनेजर के पद पर कार्यरत है ने बीड़ा उठाते हुए ग्रुप वीडियो कॉल के माध्यम से सभी को चाँददेव के दर्शन का सौभाग्य  दिया । इसीलिए कहा गया ही कि दिल्ली दिलवालों की…

*सोशल मीडिया पे चला ट्रोल*

चांद न दिखने की बनती स्थिति ,महिलाओं में उत्पन्न बेचैनी, इंतेज़ार करती पत्नियों संग पतियों के खालीपन ने सोशल मीडिया पे हंसी मजाक का एक दौर कायम कर दिया। चांद न उगने से पत्नियों के चेहरे पे छाने वाली उदासी पल में ही हंसी में तब्दील हो गयी जब सोशल मीडिया पे उन्होंने किये जा रहे कमेंट्स पढ़े।

जैसे- पत्नियों को चांद कहने से चांद नाराज़ , महिलाओं के अत्यधिक श्रृंगार को देख शरमा के छिपा चाँद, पास समाप्त होने से रुके टोल प्लाजा में चांद, सारा त्यौहार 2 दिन तो करवाचौथ भी, अनुपस्थिति पे चांद को कारण बताओ नोटिस, चाँद न निकलने के पीछे बड़ी साजिश जैसी बातें चलती रही।

खैर संस्कृति , परपंरा, त्यौहार, ये सदियों से चले आये है और सदियों तक मनाए और निभाये जाएंगे भले ही समयानुसार इसमें  आधुनिकता का प्रयोग होता रहे। चांद देव ने निश्चित ही देरी तक सुहागिनों को इंतेज़ार करवा कर करवा चौथ की महत्ता को दोगुना किया है और इंतेज़ार के बहाने पति पत्नी के बीच के प्यार के अटूट रिश्ते को गहरा।

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