घरघोड़ा क्षेत्र के ग्राम पोरडा का मिनीमाता कोल परियोजना ठप,डायवर्सन का जाँच अधर में..

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प्रशासन के जाँच में ढुलमुल रवैया से हो सकता है बड़ा घोटाला ?

शैलेश शर्मा  : घरघोड़ा । एसईसीएल को छाल के समीप बिजारी कोल मांइस आवंटित है जिसमेंखनन का कार्य चल रही है, लेकिन इससे लगा हुआ पोरडा कोल मांइस भी एसईसीएलको आवंटित है ।

  पोरडा – मिनीमाता नाम से आवंटित इस कोल ब्लाक के प्रभावित ग्राम में पिछले दिनों यहबात खुलकर सामने आई कि बजरमुड़ा की तर्ज पर यहाँ भी भू-स्वामियों द्वारा भू-अर्जनकी प्रक्रिया शुरू होने के बाद कृषि भूमि में टीन के शेड व अन्य निर्माण कर रहे है।

हांलाकि इस मामले के सामने आने के बाद घरघोड़ा एसडीएम ने निर्माण कार्य पर रोकलगाते हुए सर्वे के बाद पूर्व मे किए गए निर्माण कार्य को शुन्य घोषित करने का आदेशजारी किया है, लेकिन उक्त आदेश में डायवर्सन के प्रकरणों की जाँच नहीं की गई हैं.

जबकि गौर करने वाली बात है कि कई कृषि भूमि में पक्का निर्माण कर लिया गया हैऐसे मे निर्माण को शुन्य भी माना जाता है तो भू-अर्जन के बाद हुए डायवर्सन के कारणमुआवजा राशि कई गुना बढ़ जाएगी और इसके कारण परियोजना का लागत बढ़ेगाजिससे एसईसीएल को नुकसान हो सकता है।

*पुराने खुराफात इसमें दिख रहे शामिल*

राजस्व विभाग मे भू-अर्जन के कार्यों को देख रहा एक बाबू करीब कुछ माह पूर्व ही सेवानिवृत हो चुका हैं इसके बाद सेवा वृद्धि अभी नहीं हो पाई है इसके बाद भी उक्तबाबू द्वारा ।इस परियोजना से जुड़े भू-अर्जन के कार्यों का लेखा-जोखा देखा जा रहा है। इसको लेकरतहसील कार्यालय में का एक बार फिर से चर्चा का विषय बना हुआ है।

महार्जेको मे भी यही कारामातमहाराष्ट्र पावर जनरेशन को आवंटित कोल ब्लाक गारे-पेलमा सेक्टर -2 के प्रभावित क्षेत्रमें भी खरीद-बिक्री व निर्माण कार्य पर रोक लगाने का आदेश जारी हुआ था, लेकिनउक्त आदेश के बाद भी मौके पर देखा जाए तो खरीद-बिक्री व डायवर्सन का कार्य थोक में हुआ है। जिसके कारण इस परियोजना की लागत बढ़ी और आज भी विवादों में उलझा हुआ है।

*क्या कहते है एस.डी.एम. घरघोड़ा*

सर्वे के बाद हो रही निर्माण को शुन्य घोषित कर दिया है। गणना पत्रक तैयारकरने के पूर्व सभी बिन्दुओं पर जाँच करने के बाद ही गणना पत्रक तैयार कियाजाएगा। डायवर्सन के बिन्दु पर भी जाँच की जाएगी ।

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