खनिज माफियाओ ने एनआरडीए को अरबो रूपये का लगाया चुना…

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Deepak Mittal

आरंगः छत्तीसगढ़ की कैपिटल सिटी अटल नगर नया रायपुर जो प्रदेश की ड्रीम परियोजना है, जिसके लिए राज्य सरकार ने विकास खंड आरंग एवं अभनपुर के लगभग 27 गांवो के निजी कृषि भूमि एवं सरकारी भूमि को एनआरडीए को आबंटित कर नया रायपुर को विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित करने की जिम्मेदारी दिया है।

नये रायपुर के निर्माण के लिए ही एनआरडीए का गठन किया है। जहां छत्तीसगढ़ के सभी विभागीय कार्यालय, मंत्रालय, सचिवालय मुख्यमंत्री, मंत्री आवास, आई.एस., आई.पी.एस, अधिकारी कर्मचारी का शासकीय आवास कार्यालय, रेलवे स्टेशन, स्टेडियम, मनोरंजन पार्क, बिजनेस पार्क सहित विविध संस्थाओं के लिए उक्त भूमि को आबंटित किया गया है।

जिसके लिए पुरे नया रायपुर के निजी एवं सरकारी भूमि का एक एक इंच की भूमि का उपयोगिता तय है। उक्त परियोजना क्षेत्र के गावो का निजी भूमि को किसानो से भू अधिग्रहण कर एनआरडीए द्वारा क्रय किया जा चूका है, जो की एनआरडीए की अधिपत्य की लगभग 500 एकड़ क्रय की गई एवं शासकीय बहुपयोग के लिए प्रस्तावित भूमि जो महज 4-5 गांवो की बहुपयोगी भूमि को जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी के गैर जिमेदारी रवैये के कारण शासन को अरबो रूपये का अनावश्यक अतिरिक्त भार क्षति उठाना पडेगा।

जिसके लिए संबंधित विभाग के अधिकारी कर्मचारी जिमेदार है, कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा। परियोजना क्षेत्र के  बहुपयोगी समतल भूमि जो लगभग 500 एकड़ भूमि को 25-30 फुट गहरा खाई मुरम खदान में तब्दील कर राज्य सरकार को खरबों रूपये का अतिरिक्त भार में डाल दिया है।

सत्ता परिवर्तन का कोई असर नहीं कांग्रेस सरकार हो या भाजपा सरकार जब एनआरडीए के अधिकारी अपनी संपत्ति की रक्षा के लिये जब तक सामने नहीं आयेगे और शक्ति से कार्यवाही नहीं करेगे तब तक रोक लगाना नामुमकिन होगी।

नहीं क्योंकि तत्कालीन एनआरडीए के सीईओ फयाज फकीर तंबोली एवं सहायक प्रबंधक भूमि एक्का ने पूर्व में साहसिक कार्यवाही किया था जिसका असर लंबे समय तक अवैध मुरम खनन में रोक लगी थी।

लेकिन खनिज विभाग की खानापूर्ति कार्यवाही जिसमें पेनाल्टी की कार्यवाही मात्र से खनिज माफिया पर लगाम लगाया जाना असंभव है। परियोजना क्षेत्र में मुरम चोरी के प्रकरणों में चोरी करने वाले वाहनों को राजसात करने एवं वसूली के प्रकरण के लिए खनिज विभाग को दबाव बनाया था।

जिसका नतीजा की कई गाड़ी 10-10 महीने थाने में सड़ रहे थे। जिसके कारन खनिज माफियाओ के हांथ-पांव फूलने लगा था, उसी प्रकार कड़ी कार्यवाही किये जाने से मुरम का अवैध खनन पर रोक लगेगी।

सख्त कार्यवाही नहीं होने से माफिया की हिम्मत बढ़ी हुई है। रोज रात्रि में उक्त स्थलों में दर्जनों चैन माउंटेन मशीन सहित सैकडो हाईवा मुरम खनन में लगी होती है।

साथ ही उसका अवैध भंडारण ग्राम बकतरा में सैकडो ट्रीप स्टाक रोज पड़ा रहता है। जिसे दिन में उक्त माल को खुलेआम परिवहन लोडिंग कर बाजार में खपा दिया जाता है। क्या यह अवैध मुरम चोरी एवं रॉयल्टी चोरी का खेल बिना विभाग के सांठ-गांठ के संभव है..? अथवा खनिज माफियां शासन प्रशासन पर भारी पड़ रहा है।

अवैध मुरम चोरी का खेल  किसी सफेद पोस नेता के संरक्षण में फल-फूल रही है, यह जांच कार्यवाही से समझ में आएगी। इतनी बड़ी चोरी को अंजाम दिया जा रहा है। जिस पर एनआरडीए प्रशासन चुप्पी साधे बैठी है।

आखिर क्यों और कैसे निजी क्रय की गई भूमि को खोदने का सिलसिला अभी कुछ महीनों में ज्यादा बढ़ी है। वर्षों में विगत 3-4 सालो से ठोस कार्यवाही नहीं किये जाने से खनन माफिया करोड़ों पति अरबपति हो गये है। संलिप्त अधिकारी कर्मचारी लाल हो रहे है। कार्यवाही नहीं किये जाने से माफिया बेलगाम हो गया है।

महज पांच गावो की जांच किया जावे जिसमे ग्राम नवागावं (खुटेरी) बस्ती के दाये, बाये, पीछे लगभग 150 एकड़ भूमि जो कंटेनर यार्ड, रेलवे स्टेशन, सत्य साईं हास्पिटल, पारधी डेरा, रिको, बीएससीपीएल चीचा बस यार्ड के पीछे लगभग 200 एकड़, एनआरडीए कार्यालय से लगा कयाबांधा डैम में लगभग 100 एकड़, नवागांव खपरी में लगभग 50 एकड़ छतौना में लगभग 10 एकड़ इस प्रकार 5-6 गावो में ही अरबों रुपये का शासन को क्षति हुई है, बाकि सभी 27 गावो का जांच किया जाये तो खरबों रूपये का चुना राज्य सरकार को खनन माफिया एवं जिमेदार अधिकारी कर्मचारियों के कारण लगाया गया है। 

संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंचो से मुरम खनन के संदर्भ में जानकारी लिया गया तो सरपंच नवागांव भुनेशु यादव एवं सरपंच रिको चंद्रविजय मारकंडे ने बताया की खनिज विभाग एवं एनआरडीए को कार्यवाही करने के लिए दूरभाष एवं लिखित शिकायत निरंतर कर रहे है। सरपंच संघ द्वारा भी सामूहिक शिकायत किया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है।

कई बार खनन स्थल में रात-रात जागकर पंचायत प्रतिनिधियों के साथ जान जौखिम में डालकर वाहनों को पकड़कर खनिज विभाग सहित एनआरडीए को सूचित किया गया लेकिन कोई नहीं आते है, जिसके कारण परियोजना क्षेत्र के सरपंच खनिज माफियाओ के निशाने में है। ग्रामीण सहित देखने वालो को लगता है की सरपंच एवं पंचायत के मिलीभगत से अवैध खनन चल रही है, लेकिन वो सरासर गलत है।

हम लोग परियोजना क्षेत्र के सरपंच साथीगण अवैध मुरम खनन पर कड़ी कार्यवाही की मांग को लेकर शिकायत पत्र प्रेषित कर निरंतर कर रहे है। उक्त अवैध खनन से हमारे गावं में हमारी प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है।

मिडिया के माध्यम से शासन से हम अनुरोध करते है की राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से लेकर एनआरडीए क्षेत्र में अवैध खनन पर वाहन की जप्ती, कर राजसात की कार्यवाही सहित खनन स्थल में जप्त वाहनों एवं वाहन मालिको के विरुद्ध खनन क्षेत्र की गड्डा नापकर वसूली की कार्यवाही करेगी, तभी अवैध मुरम खनन पर लगाम लगेगी। इस संबंध में खनिज कलेक्टर किशोर गोलघोटे से बार-बार मोबाईल से संपर्क करने पर भी उन्होने मोबाईल नही उठाया।

संकलनकर्ता रोशन चंद्राकर

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Author: Deepak Mittal

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