सुशासन तिहार का असर: सरपंच ने ही तोड़ा अपने पति का अतिक्रमण
बालोद,, जिला मुख्यालय से 3 किमी दूर ग्राम मेंड़की में ओरमा सरपंच मंजूलता साहू ने अपने पति के मकान से खुद ही बुलडोजर चलवाकर अतिक्रमण हटा दिया। 30 साल पुराने कब्जे को लेकर गांव में चर्चा है कि सरपंच ने बिना किसी सरकारी नोटिस के ये कदम उठाया।
ओरमा निवासी रोहित कुमार साहू पिता खोरबाहरा राम साहू ने 14 मई को ‘सुशासन तिहार’ में शिकायत की थी कि मेंड़की निवासी परस राम साहू ने निजी भूमि से लगी शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर रखा है।
शिकायत पर तहसीलदार आशुतोष शर्मा के आदेश से हल्का पटवारी तरन्नुम खान ने शिकायतकर्ता, ग्राम पटेल व ग्रामीणों की मौजूदगी में परस साहू की भूमि का सीमांकन किया। सीमांकन में लगभग 3-4 डिसमिल शासकीय भूमि पर अतिक्रमण पाया गया।
सीमांकन के बाद सरपंच मंजूलता साहू को जानकारी मिली कि उनके पति की मूल भूमि से सटी शासकीय भूमि पर कब्जा है। इसके बाद 26 मई से 4 जून के बीच सरपंच ने स्वयं बुलडोजर लगवाकर अतिक्रमित हिस्से को हटवा दिया।
“रोहित साहू की शिकायत पर पटवारी द्वारा चिन्हित स्थल से हमने अतिक्रमण हटा दिया है। यदि शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं है तो दोबारा सीमांकन करवा सकते हैं।”
सरपंच का वर्जन
“शिकायतकर्ता रोहित साहू ने सही शिकायत की है। नियमतः शासकीय भूमि को खाली करना जरूरी है। शासन का भी स्पष्ट निर्देश है कि अतिक्रमण मुक्त किया जाए। यह जमीन मेरे ससुर स्व. फूल सिंह साहू ने 35 साल पहले खरीदी थी और तब से हम काबिज हैं। फिर भी सरपंच होने के नाते मैंने खुद पहल कर अतिक्रमण हटाया है। प्रशासन को चाहिए कि सभी अतिक्रमण पर समान कार्रवाई करे।”
आमतौर पर 30 साल से काबिज अतिक्रमण के मामलों में तहसील न्यायालय से नोटिस की प्रक्रिया अपनाई जाती है। लेकिन यहां सरपंच ने नोटिस का इंतजार किए बिना स्वेच्छा से कार्रवाई की, जिससे पूरे क्षेत्र में इसकी सराहना हो रही है।
Author: Deepak Mittal










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