दिल्ली। अमेरिका ने भारत को पनडुब्बी रोधी युद्धक सोनोबॉय और संबंधित उपकरणों की संभावित विदेशी सैन्य बिक्री को मंजूरी दे दी है। इस करार की अनुमानित लागत 52.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन द्वारा मंजूरी मिलने के बाद, यह बिक्री भारत की समुद्री ताकत को और बढ़ाएगी और उसकी पनडुब्बी रोधी क्षमताओं को मजबूत करेगी।
सोनोबॉय क्या होते हैं?
सोनोबॉय, हवा से प्रक्षिप्त किए जाने वाले इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सेंसर होते हैं जो पानी के भीतर की ध्वनियों को रिकॉर्ड करते हैं और रिमोट प्रोसेसर तक भेजते हैं। ये पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) के लिए अत्यंत प्रभावी और किफायती उपकरण होते हैं, जिनका उपयोग हवाई ASW युद्धक विमानों द्वारा किया जा सकता है।
जानिए क्या है बिक्री जके मुख्य पॉइंट्स
अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने एक प्रेस रिलीज में कहा कि कांग्रेस को इस संभावित बिक्री की सूचना दे दी गई है। इस बिक्री में शामिल हैं:
– AN/SSQ-53G हाई एल्टीट्यूड एंटी-सबमरीन वारफेयर (HAASW) सोनोबॉय
– AN/SSQ-62F HAASW सोनोबॉय
– AN/SSQ-36 सोनोबॉय
इनके साथ ही तकनीकी और पब्लिकेशन डेटा डॉक्यूमेंटेशन, अमेरिकी सरकार और ठेकेदार द्वारा इंजीनियरिंग और तकनीकी सहायता, रसद और कार्यक्रम सेवाओं का भी समावेश है
हो सकता है अमेरिका-भारत के संबंधों पर प्रभाव
यह प्रस्तावित बिक्री अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों का समर्थन करती है। इससे अमेरिका-भारत के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत किया जाएगा और एक प्रमुख रक्षा साझेदार की सुरक्षा में सुधार होगा। भारत-प्रशांत और दक्षिण एशिया क्षेत्रों में राजनीतिक स्थिरता, शांति, और आर्थिक प्रगति के लिए भारत एक महत्वपूर्ण शक्ति है।
भविष्य की सुरक्षा में सुधार
इस बिक्री के माध्यम से भारत की एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों से पनडुब्बी रोधी युद्ध संचालन की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। यह भारत को वर्तमान और भविष्य के समुद्री खतरों का सामना करने में सक्षम बनाएगा। भारत के सशस्त्र बलों को इस उपकरण को शामिल करने में कोई परेशानी नहीं होगी।
Author: Deepak Mittal









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