बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों पर नौकरी का संकट, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंडराया खतरा

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

(जे के मिश्र) : बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में तीन हजार बीएड डिग्रीधारी सहायक शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने बीएड डिग्रीधारियों की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक पद के लिए केवल डीएलएड डिप्लोमाधारकों की योग्यता को मान्य करार दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद प्रदेश के विभिन्न प्राथमिक स्कूलों में तैनात बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों के सामने नौकरी का संकट खड़ा हो गया है। अब सवाल उठ रहा है कि राज्य सरकार इस पर क्या रुख अपनाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अब प्राथमिक स्कूलों में सहायक शिक्षक के पद पर केवल डीएलएड डिप्लोमाधारकों की ही नियुक्ति की जाएगी।


फैसले के बाद राजधानी रायपुर में कई बीएड डिग्रीधारी शिक्षक घड़ी चौक पर प्रदर्शन करते नजर आए। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को ज्ञापन सौंपकर अपनी चिंताओं को जाहिर किया है। उन्होंने सरकार से निवेदन किया है कि वे जनजाति और अनुसूचित जाति से संबंधित शिक्षकों को विशेष ध्यान दें। शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से इन पदों पर कार्यरत हैं और उनके परिवारों की आजीविका भी इसी नौकरी पर निर्भर है।


राज्य सरकार ने भी हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसके बाद अब राज्य सरकार की आगे की रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हैं।

महाधिवक्ता कार्यालय के सुझाव पर अमल की मांग
सहायक शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को सौंपे अपने ज्ञापन में महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी द्वारा कोर्ट में दिए गए सुझाव को लागू करने की मांग की है। विधि अधिकारी ने अदालत को बताया था कि छत्तीसगढ़ भर्ती नियम 2019 के तहत बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों को सहायक शिक्षक के वेतन पर उच्च श्रेणी शिक्षक के 15,588 रिक्त पदों के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है। शिक्षकों ने इस सुझाव पर अमल करने की अपील की है, ताकि उनकी नौकरी बच सके और उन्हें उचित वेतनमान भी मिल सके।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

Leave a Comment