
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में प्रदेश का पहला ओपन जेल बनने जा रहा है। इस संबंध में मुख्य सचिव ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को जानकारी दी है। चीफ सेक्रेटरी ने बताया कि प्रदेश की जेलों में 15,485 कैदियों को रखने की क्षमता है, लेकिन वर्तमान में 19,476 कैदी बंद हैं, जो क्षमता से तीन हजार 991 अधिक हैं।
हत्या के आरोपी के रिश्तेदारों ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा को पत्र लिखकर जेलों की अव्यवस्था और कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार पर ध्यान आकर्षित किया था। पत्र में लिखा गया था कि जेल में बंद परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। इस पर हाई कोर्ट ने गंभीरता से संज्ञान लेते हुए प्रदेशभर की जेलों में बंद कैदियों की केस हिस्ट्री प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच में डीजीपी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तिथि तय की गई है।
मुख्य सचिव ने हाई कोर्ट को बताया कि प्रदेश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने रायपुर और बिलासपुर जिलों में विशेष जेलों की स्थापना की योजना बनाई है और बेमेतरा में खुली जेल की स्थापना का काम अंतिम चरण में है।
अधिवक्ता शिवराज सिंह ने केंद्रीय जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों की स्थिति को लेकर एक जनहित याचिका दायर की थी। इसके बाद एक बंदी के रिश्तेदार ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर जेलों की अव्यवस्था की पोल खोल दी थी। हाई कोर्ट ने इस पत्र को स्वत: संज्ञान में लेते हुए एक याचिका के रूप में स्वीकार कर लिया।
प्रारंभिक सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि जेलों में कैदियों के स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं को लेकर काम किया जा रहा है। रायपुर और बिलासपुर में विशेष जेलों की स्थापना के अलावा बेमेतरा में खुली जेल की स्थापना की जानकारी दी गई। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि रायपुर जिले में विशेष जेल के लिए भूमि मिल चुकी है और बेमेतरा में खुली जेल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।
जेल में मासूमों की स्थिति
जेलों में महिला कैदियों के साथ 82 बच्चे भी हैं। इसके अलावा 340 कैदी ऐसे हैं जिन्हें 20 साल से अधिक की सजा सुनाई गई है और उनकी अपील सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई है। प्रदेश की जेलों की कुल क्षमता 15,485 है, जबकि 19,476 कैदी बंद हैं। इनमें से 1,843 कैदी कुशल पेशेवर हैं और 504 वरिष्ठ बंदी हैं। चार कैदियों ने जेल से भागने की भी कोशिश की थी।
हाई कोर्ट ने अधिवक्ता रणवीर सिंह मरहास को न्यायमित्र नियुक्त कर प्रदेश के जेलों की स्थिति की पड़ताल करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
Author: Deepak Mittal









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