May 2025

Deepak Mittal

कलाकारों और साहित्यकारों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का भावनात्मक फैसला — मासिक पेंशन बढ़ाकर 5000 रुपये की गई

रायपुर।छत्तीसगढ़ सरकार ने कलाकारों और साहित्यकारों के जीवन में राहत और सम्मान की एक नई किरण जगाई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के उन बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर साहित्यकारों व कलाकारों के लिए मासिक पेंशन राशि को 2000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य की संवेदनशील और समावेशी शासन प्रणाली का प्रतीक बताया और कहा, “हमारे कलाकार और साहित्यकार समाज की आत्मा हैं। उनका योगदान अमूल्य है। यह निर्णय केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि उनके प्रति हमारी गहरी संवेदना और सम्मान का प्रतीक है।” इतिहास और विकास का संक्षिप्त विवरण यह पेंशन संस्कृति विभाग की वित्तीय सहायता योजना नियम-1986 के अंतर्गत दी जाती है, जिसकी शुरुआत 1986 में हुई थी। शुरुआत में सहायता राशि न्यूनतम 150 रुपये और अधिकतम 600 रुपये थी। वर्ष 2007 में इसे 1500 रुपये, और 2012 में 2000 रुपये प्रतिमाह किया गया। 12 वर्षों बाद अब पहली बार इसमें बढ़ोतरी कर इसे 5000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। 162 लाभार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ वर्तमान में राज्य के 162 कलाकारों और साहित्यकारों को यह मासिक पेंशन मिल रही है। अब उन्हें सालाना 24,000 रुपये की बजाय 60,000 रुपये की सहायता मिलेगी, जिससे वे अपनी बुनियादी जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगे। राज्य पर अतिरिक्त व्यय, लेकिन गौरवपूर्ण दायित्व इस संशोधन से राज्य सरकार पर 58.32 लाख रुपये का अतिरिक्त वार्षिक व्यय भार आएगा। कुल वार्षिक व्यय अब 38.88 लाख रुपये से बढ़कर 97.20 लाख रुपये हो जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह व्यय राज्य सरकार के लिए कोई बोझ नहीं, बल्कि गौरवपूर्ण कर्तव्य है। आर्थिक सहारा ही नहीं, आत्मबल और सामाजिक सम्मान भी सरकार के इस फैसले से केवल आर्थिक सहारा नहीं मिलेगा, बल्कि कलाकारों और साहित्यकारों को आत्मबल, सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान का अनुभव भी होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग कला, साहित्य और संस्कृति के संवर्धन में अपना संपूर्ण जीवन अर्पित कर चुके हैं, उनकी गरिमा बनाए रखना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।

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Deepak Mittal

छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्रांति की ओर ऐतिहासिक कदम — मंत्रिपरिषद ने नई औद्योगिक नीति 2024-30 को दी मंजूरी

रायपुर।छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को देश का प्रमुख औद्योगिक और रोजगार हब बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में कई महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी गई। यह निर्णय राज्य के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में आमूलचूल परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता, रोजगार में आएगी तेजी संशोधित नीति के तहत, जिन उद्योगों में छत्तीसगढ़ के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार मिलेगा, उन उद्योगों को विशेष अनुदान दिया जाएगा। इससे राज्य में स्थानीय रोजगार दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी और युवाओं का पलायन भी रुकेगा। हाइटेक कृषि तकनीक को मिलेगा बढ़ावा हाइड्रोपोनिक और एयरोपोनिक जैसी अत्याधुनिक खेती तकनीकों को अब औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा बनाया जाएगा। इससे किसानों को ऑटोमेशन, आधुनिक उपकरण और सूचना प्रौद्योगिकी से जोड़ा जाएगा, जिससे खेती की उत्पादकता और आय दोनों में वृद्धि होगी। खेल, शिक्षा और पर्यटन को नई उड़ान खेल और युवा सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार निजी खेल अकादमियों और प्रशिक्षण केंद्रों को प्रोत्साहन देगी, जिससे खेल प्रतिभाओं को बेहतर मंच मिलेगा। गुणवत्तापूर्ण विश्वविद्यालयों की स्थापना को बढ़ावा देकर छत्तीसगढ़ को शैक्षणिक हब के रूप में विकसित किया जाएगा। बस्तर और सरगुजा जैसे पिछड़े क्षेत्रों में होटल और रिसॉर्ट निर्माण हेतु न्यूनतम निवेश सीमा घटाकर स्थानीय पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। महिलाओं, ग्रामीण कारीगरों और दिव्यांगजनों को मिलेगा विशेष लाभ टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश करने वालों को 200% तक का प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे महिलाओं, सिलाई-बुनाई और कढ़ाई से जुड़े ग्रामीण कारीगरों को रोजगार मिलेगा।वहीं, दिव्यांगजनों की परिभाषा में बदलाव कर उन्हें ज्यादा से ज्यादा योजनाओं में शामिल किया जाएगा — यह समावेशी विकास की दिशा में अहम पहल है। लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर का होगा विस्तार राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई नई लॉजिस्टिक नीति के तहत माल परिवहन को आसान और सुलभ बनाया जाएगा, जिससे उद्योगों की लागत घटेगी और बाजार तक तेज पहुंच सुनिश्चित होगी।साथ ही, निजी औद्योगिक पार्कों और “प्लग एंड प्ले” फैक्ट्रियों को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए अनुदान प्रदान किया जाएगा। ‘इज ऑफ लिविंग’ के लिए शिक्षा और रिटेल सेक्टर को भी मिलेगा बढ़ावा राज्य सरकार उन क्षेत्रों में, जहां सुविधाएं सीमित हैं, निजी CBSE स्कूलों और मल्टीप्लेक्स युक्त मिनी मॉल्स को भी थ्रस्ट सेक्टर का दर्जा देगी, जिससे जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा और निवेशकों के लिए नए अवसर खुलेंगे।

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अवैध खनिज उत्खनन पर जिला प्रशासन सख्त, 1 जेसीबी व 7 ट्रैक्टर जप्त

बिलासपुर, 14 मई। जिला प्रशासन द्वारा अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन पर सख्ती बरतते हुए बड़ी कार्रवाई की गई है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर जिला खनिज विभाग ने 10 और 13 मई को तखतपुर, सकरी, मोढ़े, बेलसरी, मंगला, कुडूदंड, कोनी सहित कई क्षेत्रों में जांच अभियान चलाया। इस दौरान बिना अनुमति खनिज का उत्खनन और परिवहन करते पाए गए कुल 1 जेसीबी और 7 ट्रैक्टर को जब्त किया गया है। बेलसरी क्षेत्र में खनिज मिट्टी का अवैध उत्खनन एवं परिवहन करते पाए जाने पर 1 जेसीबी और 3 ट्रैक्टरों को जब्त कर थाना तखतपुर को सुपुर्द किया गया। वहीं कुडूदंड क्षेत्र में बिना अभिवहन पास के रेत का परिवहन करते हुए 4 ट्रैक्टर जब्त कर थाना कोनी में सुरक्षार्थ रखा गया है। खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के विरुद्ध कार्रवाई सतत जारी रहेगी। प्रशासन की सख्ती के बावजूद खनिज माफिया सक्रिय हैं, और यह आशंका जताई जा रही है कि विभागीय कार्रवाई की पूर्व जानकारी माफियाओं तक पहुंच रही है, जिससे वे बच निकलते हैं। प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि भविष्य में और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

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नवागांव सल्का समाधान शिविर में 49 आवेदनों का हुआ निराकरण, ग्रामीणों को विभिन्न योजनाओं का लाभ

बिलासपुर, 14 मई। सुशासन तिहार के अंतर्गत बिल्हा जनपद के ग्राम नवागांव सल्का में आयोजित समाधान शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर सराहनीय पहल की गई। शिविर में कुल 103 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 49 मामलों का मौके पर ही निराकरण किया गया। शिविर में प्रबल प्रताप सिंह जू देव की विशेष उपस्थिति रही। उनके साथ कोटा जनपद अध्यक्ष सूरज साधे लाल भारद्वाज, उपाध्यक्ष मनोहर सिंह राज, एडीएम शिव कुमार बनर्जी, एसडीएम नितिन तिवारी, सीईओ युवराज सिंहा समेत कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। शिविर में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कृषि, महिला एवं बाल विकास, लोक निर्माण, विद्युत, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्वास्थ्य, परिवहन, पुलिस, शिक्षा, खाद्य एवं उद्योग, क्रेडा, उद्यानिकी सहित विभिन्न विभागों ने अपने-अपने स्टॉल लगाए और योजनाओं की जानकारी दी। विभागों ने आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर समाधान की प्रक्रिया अपनाई। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत हितग्राहियों को आवास की चाबी सौंपी गई, वहीं कई ग्रामीणों को आयुष्मान कार्ड समेत अन्य योजनाओं के तहत लाभान्वित किया गया। स्टॉलों का अवलोकन जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने किया, जहां अधिकारियों ने विस्तार से योजनाओं की जानकारी साझा की। इस आयोजन का उद्देश्य प्रशासन को जनता के निकट लाकर समस्याओं का त्वरित समाधान करना था, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता कर शिविर को सफल बनाया।

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मनरेगा घोटाला: बिना अनुमति 4.70 करोड़ रुपये जारी करने पर कार्यक्रम अधिकारी बर्खास्त

कोरबा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता के मामले में कार्यक्रम अधिकारी (PO) एम.आर. कर्मवीर को बर्खास्त कर दिया गया है। जिला कलेक्टर द्वारा की गई इस कड़ी कार्रवाई ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। सूत्रों के अनुसार, कर्मवीर ने जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा में पदस्थ रहते हुए, तत्कालीन सीईओ भुवनेश्वर सिंह राज के डिजिटल सिग्नेचर (DSC) का दुरुपयोग करते हुए बिना अनुशंसा और वैधानिक प्रक्रिया के 4.70 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर दी थी। यह राशि मजदूरी, सामग्री, वेतन और अन्य मदों में सीधे जारी की गई, जिसकी न तो कोई फाइल प्रक्रिया हुई, न ही जनपद सीईओ की जानकारी। सीईओ के तबादले के बाद भी जारी रहा DSC का दुरुपयोगजब भुवनेश्वर राज का स्थानांतरण हुआ और राधेश्याम मिर्झा ने नए सीईओ के रूप में कार्यभार संभाला, तब भी पीओ कर्मवीर ने पूर्व सीईओ के डीएससी का दो माह तक उपयोग कर राशि जारी की। इसकी जानकारी मिलते ही वर्तमान सीईओ ने जांच के आदेश दिए। जांच में खुला बड़ा घोटालाजांच में यह सामने आया कि 12 सितंबर 2022 से 7 नवंबर 2022 के बीच कर्मवीर ने बिना किसी वैधानिक अनुमति निम्नानुसार राशि जारी की: मजदूरी मद: ₹4,20,49,571 सामग्री मद: ₹9,84,320 प्रशासनिक मद: ₹33,04,548 अर्द्धकुशल मजदूरी: ₹7,11,046 विशेष रूप से मजदूरी मद में 4.20 करोड़ रुपये की राशि बिना किसी प्रस्ताव के जारी की गई। जवाब संतोषजनक न होने पर सेवा समाप्तजांच के आधार पर कर्मवीर को कारण बताओ नोटिस दिया गया था, परंतु दो अवसर मिलने के बाद भी उनका उत्तर असंतोषजनक पाया गया। अंततः छत्तीसगढ़ संविदा नियुक्ति नियम 2012 के अंतर्गत उन्हें एक माह का वेतन देकर बर्खास्त कर दिया गया। यह कार्रवाई जिला प्रशासन की ओर से स्पष्ट संदेश देती है कि अब किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता और पारदर्शिता में चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –

  1 मंत्रिपरिषद ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए राज्य के शासकीय विद्यालयों में ‘‘मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता

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पाकिस्तान ने BSF जवान पूर्णम साहू को भारत को सौंपा, 20 दिन बाद अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते हुई वापसी

पाकिस्तान ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान पूर्णम कुमार साहू को पंजाब में अटारी-वाघा सीमा पर भारत को सौंप दिया। उन्हें 23 अप्रैल को

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सुशासन तिहार:समाधान शिविर का आयोजन नगर में आज

आमजनों की समस्याओं का त्वरित समाधान,शिविर का लें लाभ-परमानन्द निर्मल अग्रवाल ब्यूरो प्रमुख मुंगेली 8959931111 सरगांव- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप राज्य में

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समस्याओं का त्वरित समाधान, सशक्त और संवेदनशील शासन की पहचान-धरमलाल कौशिक

सुशासन तिहार: ग्राम बदरा ब में समाधान शिविर आयोजित बदरा ब में बिल्हा विधायक हुए शामिल, हितग्राहियों को किया लाभान्वित निर्मल अग्रवाल ब्यूरो प्रमुख मुंगेली

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