नई दिल्ली: बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। खास तौर पर हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय एक बार फिर कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गया है। ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) की ताज़ा रिपोर्ट ने देशभर में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और टारगेटेड हमलों की भयावह तस्वीर पेश की है।
एक ही परिवार के 5 घर जला दिए
रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम बहुल पीरोजपुर जिले के डुमरीताला गांव में एक हिंदू परिवार के कम से कम पांच घरों को आग के हवाले कर दिया गया। यह हमला पूरी तरह सुनियोजित बताया जा रहा है।
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि हमलावरों ने कमरे में कपड़ा भरकर आग लगाई, जिससे देखते ही देखते पूरा घर धू-धू कर जलने लगा।
दरवाजे बाहर से बंद, बाल-बाल बची जान
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, साहू परिवार (नाम बदला गया) इस घटना के बाद से सदमे में है।
परिवार के लोगों ने बताया कि
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आग लगने के वक्त वे घर के अंदर फंसे हुए थे
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दरवाजे बाहर से बंद थे, जिससे जान बचाना मुश्किल हो गया
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किसी तरह बांस की बाड़ काटकर आठों सदस्य बाहर निकले
हालांकि, घर का सारा सामान जलकर राख हो गया और पालतू जानवर भी जिंदा जल गए। यह गांव राजधानी ढाका से करीब 240 किलोमीटर दूर है।
5 संदिग्ध गिरफ्तार, लेकिन डर बरकरार
पीरोजपुर के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद मंजूर अहमद सिद्दीकी ने मौके का दौरा किया और जांच का भरोसा दिया है।
अब तक 5 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिसमें लोग आग बुझाने की कोशिश करते दिख रहे हैं।
6 महीनों में 71 हमले, 30 से ज्यादा जिले प्रभावित
HRCBM की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि
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जून से दिसंबर 2025 के बीच
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ईशनिंदा के आरोपों के नाम पर 71 घटनाएं दर्ज हुईं
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ये घटनाएं 30 से ज्यादा जिलों में फैली हैं
चांदपुर, चट्टोग्राम, दिनाजपुर, खुलना, कोमिला, गाजीपुर, सिलहट, टांगेल और सुनामगंज जैसे जिलों में हिंदुओं को बार-बार निशाना बनाया गया।
अलग-थलग नहीं, सिस्टमैटिक हमला – HRCBM
HRCBM ने रिपोर्ट में साफ कहा है कि ये घटनाएं कोई संयोग नहीं हैं।
“ईशनिंदा के आरोप बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का हथियार बनते जा रहे हैं।
इसके बाद अक्सर पुलिस कार्रवाई, भीड़ हिंसा और सामाजिक सज़ा देखने को मिलती है।”
बड़ा सवाल
बांग्लादेश में हिंदुओं के घर जल रहे हैं, परिवार डर के साए में जी रहे हैं और हमले बढ़ते जा रहे हैं।
सवाल यह है कि क्या अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई है?
और क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ती हिंसा पर कोई ठोस कदम उठाएगा?
यह रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के लिए हालात लगातार खतरनाक होते जा रहे हैं।
Author: Deepak Mittal










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