मंदिर की संपत्ति का मालिक पुजारी नहीं, हाईकोर्ट ने उन्हें बताया प्रतिनिधि

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मंदिर की संपत्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि पुजारी को मंदिर की संपत्ति का मालिक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पुजारी केवल देवता की पूजा करने और मंदिर का सीमित प्रबंधन करने के लिए नियुक्त एक प्रतिनिधि होता है, न कि स्वामी।

बता दें कि यह फैसला जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने उस याचिका पर सुनाया, जो धमतरी जिले के श्री विंध्यवासिनी मां बिलाईमाता मंदिर के पुजारी परिषद अध्यक्ष मुरली मनोहर शर्मा ने दायर की थी। शर्मा ने राजस्व मंडल, बिलासपुर के 3 अक्टूबर 2015 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई थी।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब मुरली मनोहर शर्मा ने तहसीलदार के समक्ष आवेदन देकर अपना नाम मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग की थी। तहसीलदार ने उनके पक्ष में आदेश जारी किया, लेकिन एसडीओ ने इस आदेश को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ शर्मा ने अपर आयुक्त रायपुर के समक्ष अपील की, जो खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने राजस्व मंडल में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की, जिसे भी खारिज कर दिया गया। शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर यह दलील दी कि तहसीलदार का आदेश न्यायोचित था और अन्य अधिकारियों ने मामले की सही समीक्षा नहीं की।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

October 2026
S M T W T F S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *