रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकार की योजनाओं और नीतियों की गंभीर खामियों को उजागर किया है। रिपोर्ट में न केवल रायपुर के विवादित स्काई वॉक प्रोजेक्ट को ‘फिजूलखर्ची’ बताया गया, बल्कि बिजली विभाग, कौशल विकास और सिंचाई परियोजनाओं में भी भारी अनियमितताओं का खुलासा किया गया है।
बिना मंजूरी निकला स्काई वॉक का टेंडर
CAG रिपोर्ट में कहा गया है कि राजधानी रायपुर में बनाए जा रहे स्काई वॉक प्रोजेक्ट को बिना प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरी के ही शुरू कर दिया गया। टेंडर प्रक्रिया में भी नियमों की अनदेखी की गई और कंसल्टेंट द्वारा प्रथम चरण का कार्य पूरा किए बिना ही कार्यादेश जारी कर दिया गया। डिजाइन और ड्राइंग में बार-बार बदलाव के कारण लागत में भारी बढ़ोतरी हुई, जिससे प्रोजेक्ट अधूरा रह गया।
बिजली विभाग को 2157 करोड़ का नुकसान
राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड की उपभोक्ता बिलिंग और संग्रहण दक्षता पर भी रिपोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच 9283.38 मिलियन यूनिट बिजली वितरण के दौरान नष्ट हो गई, जिससे कंपनी को 2157.15 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हुआ।
कौशल विकास योजना में लक्ष्य से काफी पीछे
रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2014-2023 के दौरान 7.27 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन केवल 4.70 लाख (65%) युवाओं को ही प्रमाणित किया जा सका। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 48% ही परीक्षा पास कर सके और उनमें से भी 39% को रोजगार नहीं मिला। इतना ही नहीं, 9 साल बीत जाने के बाद भी प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों को मान्यता नहीं मिलने से युवाओं को रोजगार के अवसरों से वंचित रहना पड़ा।
अरपा भैंसाझार परियोजना में भी अनियमितता
CAG रिपोर्ट में अरपा भैंसाझार परियोजना पर भी सवाल उठे हैं। वन, पर्यावरण, अंतरराज्यीय और केंद्रीय जल आयोग से मंजूरी के बिना ही परियोजना का काम शुरू कर दिया गया, जिससे कार्य दायरे और लागत में बार-बार परिवर्तन हुआ।

Author: Deepak Mittal
