बिना थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस गाड़ी चलाने वालों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

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सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहे वाहनों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार को पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत बिना वैध थर्ड-पार्टी बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल पंप पर फ्यूल नहीं देने की व्यवस्था पर काम किया जाएगा।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं। ऐसे में सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिलने में परेशानी होती है।

सुप्रीम कोर्ट ने IRDAI और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार करने को कहा है, जिसमें वाहन की नंबर प्लेट के जरिए उसके बीमा की स्थिति की जांच की जा सके। इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन यानी ANPR कैमरों के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है।

अदालत ने संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 2024-25 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में करीब 56 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 16.54 करोड़ वाहन बिना बीमा के हैं, जबकि देश में कुल पंजीकृत वाहनों की संख्या करीब 30.48 करोड़ है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत हर वाहन के लिए थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य है। अदालत का मानना है कि पेट्रोल पंप पर बीमा की जांच की व्यवस्था होने से बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान आसान होगी और वाहन मालिक समय पर बीमा कराने के लिए भी प्रेरित होंगे।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने नए वाहनों के थर्ड-पार्टी बीमा की अवधि में भी बदलाव का निर्देश दिया है। साल 2018 के आदेश के तहत नई कारों के लिए तीन साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए पांच साल का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य था। अब इसे बढ़ाकर नई कारों के लिए चार साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए छह साल करने का निर्देश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने IRDAI को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने को कहा है। वहीं, राज्य पुलिस को ऐसे मोबाइल उपकरण या ऐप उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, जिनसे मौके पर ही वाहन के बीमा की स्थिति जांची जा सके और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ई-चालान जारी किया जा सके।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट की इस पहल का उद्देश्य बिना बीमा वाले वाहनों पर लगाम लगाना और सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।

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Author: Deepak Mittal

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