रूस ने भारत को दिया बड़ा ऑफर, अमेरिका हैरान, चीन सन्न

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पुतिन की भारत यात्रा में हो सकती है KH-69 मिसाइल डील, ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनेगी घातक तकनीक

नई दिल्ली। भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी एक नए मुकाम पर पहुंचने जा रही है। दिसंबर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच एक बड़ी डिफेंस डील पर मुहर लग सकती है। बताया जा रहा है कि पुतिन भारत को KH-69 क्रूज मिसाइल देने का प्रस्ताव लेकर आएंगे, और यह सिर्फ मिसाइल सप्लाई तक सीमित नहीं होगी — रूस इस बार मिसाइल तकनीक भी भारत को सौंपने को तैयार है।

सुखोई-30 के लिए बनी KH-69

KH-69 एक अत्याधुनिक एयर-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल है, जिसे विशेष रूप से सुखोई-30 फाइटर जेट के लिए डिज़ाइन किया गया है। भारत के पास पहले से ही सुखोई-30 की बड़ी संख्या है, जिससे यह मिसाइल तुरंत तैनात की जा सकेगी। रूस ने इस मिसाइल को यूक्रेन युद्ध में सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया है, जिससे इसकी विश्वसनीयता साबित हो चुकी है।

कम वजन, ज्यादा मारक क्षमता

KH-69 मिसाइल अपनी हल्की संरचना और घातक वार क्षमता के लिए जानी जाती है। जहां एक सुखोई-30 विमान केवल एक ब्रह्मोस मिसाइल ले जा सकता है, वहीं यह एक साथ चार KH-69 मिसाइलें ले जाने में सक्षम होगा।

  • रेंज: लगभग 400 किलोमीटर

  • गति: करीब 1000 किमी प्रति घंटा

  • वारहेड क्षमता: लगभग 300 किलोग्राम

  • विशेषता: रडार से बच निकलने की “स्टील्थ तकनीक

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगी नई ताकत

रूस ने भारत को न केवल मिसाइल सप्लाई का प्रस्ताव दिया है, बल्कि देश में ही इसके निर्माण की अनुमति देने पर भी सहमति जताई है। यानी भारत को इस तकनीक का ब्लूप्रिंट, प्रशिक्षण और उत्पादन अधिकार मिलेंगे। यदि यह डील पक्की होती है, तो यह न केवल भारत की रक्षा क्षमताओं को सशक्त बनाएगी बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत को एक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित कर सकती है।

चीन और पाकिस्तान में मची हलचल

इस सौदे से दक्षिण एशिया में सुरक्षा समीकरण बदल सकते हैं। चीन और पाकिस्तान दोनों इस डील से असहज महसूस कर रहे हैं। विशेष रूप से पाकिस्तान के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि KH-69 मिसाइल भारत से लॉन्च होकर उसकी रणनीतिक लोकेशनों तक बिना सीमा पार किए पहुंच सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह डील होती है, तो भारत की हवाई मारक क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी, जिससे दक्षिण एशिया में उसका दबदबा और अधिक मजबूत हो जाएगा।

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Author: Deepak Mittal

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