राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोषी की दया याचिका की खारिज, फांसी की सजा बरकरार
नई दिल्ली: महाराष्ट्र में वर्ष 2012 में दो साल की मासूम बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और निर्मम हत्या के दोषी रवि अशोक घुमारे को फांसी दिए जाने का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उसकी दया याचिका खारिज कर दी है। अधिकारियों ने रविवार को इसकी पुष्टि की।
राष्ट्रपति पद संभालने के बाद यह तीसरी दया याचिका है जिसे द्रौपदी मुर्मू ने खारिज किया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, घुमारे की दया याचिका 6 नवंबर 2025 को अस्वीकार की गई।
इससे पहले 3 अक्टूबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने भी दोषी को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा था। न्यायमूर्ति सूर्यकांत (वर्तमान प्रधान न्यायाधीश) की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 2:1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि आरोपी अपनी कामुक इच्छाओं पर नियंत्रण खो चुका था और उसने अपनी यौन भूख मिटाने के लिए सभी सामाजिक, नैतिक और कानूनी सीमाओं को तोड़ दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि दोषी ने एक ऐसे जीवन को बेरहमी से समाप्त कर दिया, जो अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुआ था। दो वर्षीय बच्ची के साथ किया गया अपराध उसकी विकृत और घृणित मानसिकता को दर्शाता है और यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ श्रेणी में आता है।
गौरतलब है कि निचली अदालत ने 16 सितंबर 2015 को रवि अशोक घुमारे को मौत की सजा सुनाई थी, जिसे जनवरी 2016 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था। अब राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किए जाने के बाद दोषी की फांसी की सजा पर अंतिम मुहर लग गई है।
Author: Deepak Mittal









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