खामोश गहराइयों में राष्ट्रपति की एंट्री! INS वाघषीर पर सवार होकर द्रौपदी मुर्मु ने रचा इतिहास

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समुद्र की गहराइयों में शक्ति प्रदर्शन, 19 साल बाद दोहराया गया ऐतिहासिक पल

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की सबसे आधुनिक और रहस्यमयी पनडुब्बी INS वाघशीर पर सवार होकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को इतिहास रच दिया। पश्चिमी तट पर करवार नौसेना अड्डे से समुद्री क्षेत्र का यह दौरा न केवल सामरिक दृष्टि से अहम रहा, बल्कि राष्ट्र की समुद्री ताकत का भी दमदार संदेश देता है। द्रौपदी मुर्मु पनडुब्बी से यात्रा करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति बन गई हैं।

इससे पहले वर्ष 2006 में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने पनडुब्बी की ऐतिहासिक यात्रा की थी। लगभग दो दशक बाद फिर वही पल दोहराया गया, जब राष्ट्रपति समुद्र की खामोश गहराइयों में उतरती भारतीय शक्ति का साक्षी बनीं।

नौसेना की वर्दी में दिखीं राष्ट्रपति, जवानों का बढ़ाया हौसला

पनडुब्बी में प्रवेश से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु नौसेना की वर्दी में नजर आईं और उन्होंने जवानों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। इस दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी भी करवार नौसेना अड्डे पर मौजूद रहे और राष्ट्रपति के साथ कलवरी श्रेणी की इस पनडुब्बी में सवार हुए। गौरतलब है कि राष्ट्रपति देश की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर भी हैं।

राष्ट्रपति सचिवालय ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ने स्वदेशी तकनीक से बनी INS वाघशीर में प्रवेश कर नौसेना के आत्मनिर्भर भारत मिशन को मजबूती दी।

INS वाघशीर: समुद्र के भीतर भारत की अदृश्य ताकत

नौसेना अधिकारियों के अनुसार, INS वाघशीर पी-75 स्कॉर्पीन परियोजना की छठी और अंतिम पनडुब्बी है, जिसे हाल ही में जनवरी माह में नौसेना में शामिल किया गया। यह दुनिया की सबसे शांत और घातक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों में गिनी जाती है।

तार-निर्देशित टारपीडो, एंटी-शिप मिसाइलों और अत्याधुनिक सोनार सिस्टम से लैस यह पनडुब्बी सतह और पनडुब्बी युद्ध, खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी और विशेष अभियानों के लिए डिजाइन की गई है। इसकी मॉड्यूलर संरचना भविष्य में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) जैसी उन्नत तकनीक के समावेश की भी अनुमति देती है।

संदेश साफ: समुद्र में भी भारत अडिग

राष्ट्रपति की यह यात्रा केवल एक दौरा नहीं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती सामरिक ताकत और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का प्रतीक मानी जा रही है। INS वाघशीर पर सवार होकर राष्ट्रपति मुर्मु ने साफ संकेत दे दिया है कि भारत न केवल ज़मीन और आकाश में, बल्कि समुद्र की गहराइयों में भी पूरी तरह सतर्क और सक्षम है।

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Author: Deepak Mittal

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