धान खरीदी में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा! कलेक्टर के सख्त तेवर, तीन निलंबित—दो से छीना गया वित्तीय अधिकार

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Deepak Mittal

रायगढ़: जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत चल रही धान खरीदी व्यवस्था में लापरवाही बरतने वालों पर जिला प्रशासन ने कड़ा प्रहार किया है। धान उपार्जन केंद्रों के निरीक्षण और जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के अनुमोदन से बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई में तीन समिति प्रबंधक/सहायक प्रबंधक निलंबित किए गए हैं, जबकि दो सहायक समिति प्रबंधकों का वित्तीय प्रभार तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है।

ढाला पद्धति की अनदेखी, गुणवत्ता से खिलवाड़

सहकारिता विभाग की विस्तृत जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कई धान खरीदी केंद्रों में शासन द्वारा निर्धारित ढाला पद्धति का पालन नहीं किया जा रहा था। किसानों से लाए गए धान की गुणवत्ता जांच किए बिना सीधे शासकीय बोरों में भरकर तौल की जा रही थी। यह न केवल शासन निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि इससे पूरी खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जमरगीडी और कापू समिति पर गिरी गाज

उप आयुक्त सहकारिता के अनुसार,

  • आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित जमरगीडी के सहायक समिति प्रबंधक एवं धान खरीदी प्रभारी दीनबंधु पटेल द्वारा बार-बार निर्देशों की अवहेलना की गई। कारण बताओ नोटिस का जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर उनका वित्तीय प्रभार समाप्त किया गया।

  • इसी तरह आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कापू के सहायक समिति प्रबंधक श्यामनारायण दुबे पर भी कार्रवाई करते हुए वित्तीय प्रभार तत्काल प्रभाव से छीना गया

छाल, कोड़ासिया और खड़गांव में निलंबन

जांच में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर—

  • आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित छाल के सहायक समिति प्रबंधक ठण्डाराम बेहरा,

  • आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कोड़ासिया के समिति प्रबंधक एवं फड़ प्रभारी प्रहलाद बेहरा
    को कारण बताओ नोटिस का जवाब न देने पर तत्काल निलंबित कर दिया गया।

वहीं आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित खड़गांव में नोडल अधिकारी के विरुद्ध गाली-गलौच और धमकी की शिकायत सही पाई गई। साथ ही सहायक समिति प्रबंधक कृपाराम राठिया द्वारा भी गंभीर लापरवाही सामने आने पर उन्हें भी निलंबित कर दिया गया है।

ESMA लागू, फिर भी लापरवाही—प्रशासन नाराज़

गौरतलब है कि 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक धान खरीदी अवधि में सभी संबंधित कर्मचारियों पर ESMA (आवश्यक सेवा संधारण अधिनियम) लागू है। इसके बावजूद अनियमितताओं का सामने आना प्रशासन के लिए गंभीर विषय माना जा रहा है।

कलेक्टर का सख्त संदेश

जिला प्रशासन ने सभी समितियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि धान खरीदी कार्य पूरी पारदर्शिता, तय नियमों और शासन की प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाए।

किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भविष्य में गड़बड़ी मिलने पर और भी कठोर कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।

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Author: Deepak Mittal

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