जयकारों और भक्ति भाव के बीच मां दुर्गा की विदाई दल्लीराजहरा शहर गूंजा – “जय माता दी” के उद्घोष, डीजे की थाप और भक्ति गीतों पर थिरके श्रद्धालु

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दल्लीराजहरा: नवरात्रि के पावन पर्व के समापन अवसर पर दल्लीराजहरा शहर में माता दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन अत्यंत हर्षोल्लास, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ किया गया। सुबह से ही पूरे नगर में धार्मिक माहौल बना रहा। ढोल-नगाड़ों की गूंज, डीजे की थाप और भक्ति गीतों की स्वर लहरियों से पूरा वातावरण मां दुर्गा के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

 

दल्लीराजहरा शहर में शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब
मां दुर्गा की विदाई के लिए नगर के विभिन्न पंडालों से विसर्जन यात्राएं निकाली गईं। सजीव झांकियों, ध्वज और पुष्प सजावट से सुसज्जित रथ पर विराजित मां दुर्गा की प्रतिमा जब मार्ग पर निकली, तो श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर नृत्य व गीत-संगीत में मग्न हो उठे। जगह-जगह आरती, पुष्पवर्षा और नारियल अर्पण से भक्तों ने माता को विदाई दी।

धार्मिक उल्लास और भावनाओं का संगम
विसर्जन यात्रा में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी उमंग और उत्साह के साथ शामिल हुए। महिलाएं सिर पर कलश लेकर चलीं तो युवा डीजे की धुन पर थिरकते नजर आए। ढोल-ढमाकों और शंखनाद के साथ “जय माता दी”, “हर हर महादेव” और “जयकारा माता का” के नारे गूंजते रहे। पूरा नगर भक्ति और आध्यात्मिकता की अलौकिक छटा में सराबोर हो गया।

हर्षोल्लास के साथ विसर्जन स्थल पर गूंजे मंत्रोच्चार
नगर की मुख्य विसर्जन यात्रा हर्षोल्लास के साथ विसर्जन स्थल पहुंची, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए। वहां विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच मां दुर्गा की प्रतिमा का जल में विसर्जन किया गया। विदाई के इस क्षण ने जहां भक्तों की आंखों को नम किया, वहीं अगले वर्ष “आओ मां” की प्रतीक्षा का उत्साह भी जागृत हुआ।

दल्लीराजहरा समाज में भाईचारे और एकता का संदेश
इस अवसर पर पूरे नगर में सांप्रदायिक सौहार्द्र और भाईचारे का अनोखा उदाहरण देखने को मिला। सभी वर्ग और समुदाय के लोग विसर्जन यात्रा में शामिल होकर उत्सव का हिस्सा बने। बच्चों ने पटाखों और रंग-बिरंगी आतिशबाजी से उत्सव को और भी आकर्षक बना दिया।

अगले वर्ष पुनः आगमन की कामना
श्रद्धालुओं ने माता दुर्गा से सुख-समृद्धि, शांति और नगर की खुशहाली की प्रार्थना की। विसर्जन के साथ ही नगरवासी अगले वर्ष पुनः मां दुर्गा के भव्य स्वागत की प्रतीक्षा करते हुए लौटे।

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Author: Deepak Mittal

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