पिता की जान लेने वाले आरोपी को आजीवन कारावास
घरेलू विवाद में गाली-गलौज, धमकी और चप्पल से प्राणघातक मारपीट का मामला; पुरुर पुलिस की सटीक विवेचना और अभियोजन की प्रभावी पैरवी से मिली सजा
बालोद। घरेलू विवाद के दौरान पिता की हत्या करने वाले आरोपी को सत्र न्यायालय ने दोषसिद्ध पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पुरुर थाना क्षेत्र के इस गंभीर मामले में पुलिस की सुदृढ़ विवेचना, महत्वपूर्ण साक्ष्यों के संकलन और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप आरोपी यशपाल सोरी को न्यायालय से कठोर दंड मिला।
मामला पुरुर थाना के अपराध क्रमांक 94/2025 से संबंधित है। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की धारा 294, 351(3), 117(2), 115(2) और 103 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और अभियोजन की पैरवी के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास से दंडित किया गया।
घरेलू विवाद ने लिया खूनी रूप
पुलिस के अनुसार घरेलू बात को लेकर आरोपी यशपाल सोरी का अपने पिता लचमु सोरी के साथ विवाद हुआ था। विवाद के दौरान आरोपी ने पिता के साथ गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद चप्पल से उनके साथ प्राणघातक मारपीट की गई। गंभीर मारपीट के परिणामस्वरूप लचमु सोरी की मृत्यु हो गई।
घटना के बाद पुरुर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया तथा घटना से जुड़े भौतिक एवं अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित करते हुए उनका संकलन किया गया।
साक्ष्यों को जुटाकर न्यायालय में पेश किया प्रकरण
मामले की विवेचना तत्कालीन पुरुर थाना प्रभारी उप निरीक्षक प्रदीप कंवर ने की थी, जो वर्तमान में थाना राजहरा में पदस्थ हैं। विवेचना के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों को व्यवस्थित रूप से एकत्रित किया गया। इसके बाद पुलिस ने प्रकरण को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।
प्रभावी पैरवी से आरोपी को मिली कठोर सजा
प्रकरण में शासकीय अभिभाषक तोमन साहू ने न्यायालय के समक्ष प्रभावी पैरवी की। पुलिस द्वारा विवेचना के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों तथा अभियोजन की ओर से प्रस्तुत तथ्यों और तर्कों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी यशपाल सोरी को दोषसिद्ध पाया और उसे आजीवन कारावास के दंड से दंडित किया।
मजबूत विवेचना बनी सजा का आधार
पुलिस के अनुसार इस मामले में सटीक विवेचना, घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्यों का संकलन, उपलब्ध तथ्यों का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण और अभियोजन की प्रभावी पैरवी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस की कार्रवाई और न्यायालय के फैसले से गंभीर अपराधों में मजबूत साक्ष्य जुटाने तथा प्रभावी पैरवी की अहमियत भी सामने आई है।
Author: Deepak Mittal









