AI के नाम पर छंटनी? अमेज़न समेत बड़ी कंपनियों में नौकरी कटौती की असली वजह पर सवाल

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न्यूयॉर्क: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच अमेज़न समेत कई बड़ी कंपनियों में हालिया छंटनियों ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—क्या वाकई AI नौकरियां खत्म कर रहा है, या फिर इसे कर्मचारियों की कटौती के फैसलों को सही ठहराने के लिए एक आसान वजह के तौर पर पेश किया जा रहा है?

अमेज़न के पूर्व कर्मचारी एन. ली प्लंब का मामला इस बहस को और गहरा करता है। प्लंब, जो अपनी टीम में “AI इनेबलमेंट” के प्रमुख थे और कंपनी के नए AI कोडिंग टूल के टॉप यूज़र्स में गिने जाते थे, पिछले हफ्ते अमेज़न से निकाले गए 16,000 कॉर्पोरेट कर्मचारियों में शामिल थे। उनका कहना है कि AI को न अपनाने की वजह से उनकी नौकरी नहीं गई। उनके मुताबिक, “AI को इन्वेस्टमेंट पर रिटर्न देना होता है। जब कर्मचारियों की संख्या घटाई जाती है तो एफिशिएंसी दिखती है, शेयर की कीमत बढ़ती है और इसे AI से जोड़कर एक वैल्यू स्टोरी बना दी जाती है।”

प्लंब का मानना है कि कई कंपनियां पहले से ज्यादा स्टाफ रखने के बाद अब छंटनी कर रही हैं और इसे AI से जोड़ रही हैं। वह टेक इंडस्ट्री में वर्क वीज़ा पर निर्भरता के भी आलोचक हैं और इसे अमेरिकी कर्मचारियों की जगह सस्ते विदेशी श्रमिकों को लाने से जोड़ते हैं।

अर्थशास्त्रियों की राय भी इस मुद्दे पर बंटी हुई है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर करण गिरोत्रा के अनुसार, फिलहाल यह साफ नहीं है कि AI सीधे तौर पर बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म कर रहा है। उनका कहना है कि AI से कर्मचारियों की उत्पादकता जरूर बढ़ती है, लेकिन मैनेजमेंट स्ट्रक्चर को इस तरह बदलने में समय लगता है कि कम वर्कफोर्स को सही ठहराया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि अमेज़न अभी कोविड-19 के दौरान हुई ज्यादा हायरिंग के असर को ठीक कर रहा है।

गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि लेबर मार्केट पर AI का कुल असर फिलहाल सीमित है, हालांकि मार्केटिंग, ग्राफिक डिजाइन, कस्टमर सर्विस और खासकर टेक जैसे क्षेत्रों में इसका प्रभाव ज्यादा दिख सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर तक बहुत कम कर्मचारी AI की वजह से हुई छंटनियों से प्रभावित हुए थे, हालांकि यह रिपोर्ट अमेज़न, डॉव और पिंटरेस्ट की हालिया घोषणाओं से पहले जारी हुई थी।

इन कंपनियों में पिंटरेस्ट ने AI को लेकर सबसे स्पष्ट रुख अपनाया है। कंपनी ने अपनी “AI-फॉरवर्ड रणनीति” के तहत वर्कफोर्स में करीब 15 प्रतिशत तक कटौती और AI-कुशल टैलेंट की भर्ती की बात कही है। एक्सपीडिया और डॉव ने भी अपनी छंटनी को AI और ऑटोमेशन के जरिए उत्पादकता बढ़ाने की रणनीति से जोड़ा है।

कुल मिलाकर, AI और छंटनी के बीच सीधा संबंध अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ही यह साफ हो पाएगा कि AI वास्तव में नौकरियों को खत्म कर रहा है या फिर कंपनियां संरचनात्मक बदलावों को AI के नाम पर पेश कर रही हैं।

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Author: Deepak Mittal

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