जे के मिश्र
जिला ब्यूरो चीफ
नवभारत टाइम्स 24*7in बिलासपुर
बिलासपुर। कानन पेंडारी जू की सुरक्षा एक बार फिर चर्चा में आ गई है। हर साल बारिश से पहले ही जू की बाउंड्रीवाल कमजोर होने लगती है और इस बार भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। जगह-जगह दीवारें झुक गई हैं और कई हिस्सों में इन्हें गिरने से बचाने के लिए लकड़ियों और पत्थरों का सहारा दिया गया है। आश्चर्य की बात यह है कि इतने बड़े जू की सुरक्षा अब भी अस्थायी उपायों पर टिकी हुई है।
करीब 114 एकड़ में फैले कानन पेंडारी जू को हाल ही में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली से मीडियम जू का दर्जा मिला है। यहां 650 से ज्यादा वन्य प्राणी निवास करते हैं। इसके बावजूद उनकी सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा सके हैं। मुख्य गेट के पास की दीवार और हाथियों के बाड़े के पीछे की बाउंड्री पहले भी कई बार गिर चुकी है। नई दीवार बनाने की जगह केवल ग्रीन नेट लगाकर घेराबंदी कर दी जाती है। रेस्क्यू सेंटर की ओर जाने वाले रास्ते पर भी यही हाल है। गेट नंबर एक के पास बनी सीमेंट की दीवार अब एक ओर झुक गई है और उसे लकड़ी-पत्थरों का टेका देकर खड़ा रखा गया है ताकि बारिश में गिरने से बचाया जा सके।
जू प्रबंधन ने पिकनिक स्पॉट और बच्चों के लिए गार्डन जैसी सुविधाएं तो विकसित कर दी हैं, लेकिन बाउंड्रीवाल की मरम्मत और मजबूती पर कोई ठोस योजना नहीं बन सकी है। तखतपुर रोड की तरफ फेंसिंग और पोल लगाकर घेराबंदी जरूर की गई है, मगर कई हिस्सों में अब भी ईंट की पुरानी दीवारें ही एकमात्र सहारा हैं।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सबसे बड़ी दिक्कत बजट की है। डीएफओ गणेश यू आर ने बताया कि जू की दीवारों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है, लेकिन जब तक बजट स्वीकृत नहीं होता, तब तक लकड़ियों के टेको से काम चलाया जा रहा है।
Author: Deepak Mittal









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