Lifestyle: किडनी हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में बेहद अहम भूमिका निभाती हैं। ये खून से टॉक्सिन निकालने, शरीर में फ्लूइड्स का संतुलन बनाए रखने और सोडियम, पोटैशियम व कैल्शियम जैसे जरूरी मिनरल्स को नियंत्रित करने का काम करती हैं। ऐसे में किडनी की सेहत को नजरअंदाज करना गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, क्रोनिक किडनी रोग का समय रहते पता लग जाए तो बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (GFR) और यूरिन एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन रेशियो जैसे आसान टेस्ट से किडनी की समस्याओं का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकता है। इससे न सिर्फ इलाज आसान होता है, बल्कि डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट जैसी जटिल प्रक्रियाओं से भी बचा जा सकता है।
थकान और कमजोरी हो सकती है पहला संकेत
किडनी के काम में कमी आने पर शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं, जिससे लगातार थकान और कमजोरी महसूस होती है। किडनी की बीमारी से एनीमिया की समस्या भी हो सकती है, जिससे व्यक्ति को ज्यादा थकावट और ऊर्जा की कमी महसूस होती है।
पेशाब में बदलाव को न करें नजरअंदाज
किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षणों में पेशाब में बदलाव प्रमुख है। रात में बार-बार पेशाब आना, पेशाब का रंग गहरा या जंग जैसा होना, झागदार पेशाब या पेशाब में खून आना किडनी की गड़बड़ी की ओर इशारा कर सकता है।
सूजन और अन्य शारीरिक लक्षण
किडनी सही तरह से काम न करे तो शरीर में सोडियम जमा होने लगता है, जिससे पैर, टांगें, हाथ और टखनों में सूजन आ सकती है। इसके अलावा आंखों के आसपास सूजन, त्वचा में खुजली, भूख न लगना, मतली, उल्टी और अचानक वजन कम होना भी किडनी की बीमारी के संकेत हो सकते हैं।
मांसपेशियों में ऐंठन भी चेतावनी
किडनी की कार्यक्षमता घटने से नसों और मांसपेशियों पर असर पड़ता है, जिससे मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर में दिखने वाले इन लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय रहते जांच और सही इलाज से किडनी की बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है और लंबे समय तक किडनी की सेहत को बनाए रखा जा सकता है।
Author: Deepak Mittal










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