बिलासपुर के राजकिशोर नगर में 3 करोड़ की लूट के चार आरोपी मिर्जापुर से गिरफ्तार

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बिलासपुर। राजकिशोर नगर में सराफा कारोबारी से करीब तीन करोड़ रुपये मूल्य का सोना व नकदी लूटने के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से गिरफ्तार किया है। बिलासपुर पुलिस की सूचना पर यूपी एटीएस की मदद से अहरौरा थाना क्षेत्र में कार्रवाई की गई।


मंगलवार रात वसंत विहार चौक स्थित अपनी ज्वेलरी शॉप बंद कर घर लौट रहे सराफा कारोबारी संतोष तिवारी को घर से करीब 500 मीटर पहले बदमाशों ने रोक लिया। पिस्टल दिखाकर डराने का प्रयास किया गया। पूर्व में पुलिस कांस्टेबल रह चुके संतोष तिवारी ने एक आरोपी को पकड़ लिया, जिस पर दूसरे आरोपी ने हथौड़े से हमला कर दिया। इसके बाद बदमाश उनकी कार लेकर फरार हो गए। कार में करीब 2 किलो 200 ग्राम सोने के जेवर, 350 ग्राम कच्चा सोना, 100 ग्राम फाइन गोल्ड तथा 3.50 लाख रुपये नकद रखे थे।


घटना की सूचना मिलते ही आईजी रामगोपाल गर्ग सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। मामले की जांच के लिए दस टीमों का गठन किया गया, जिनमें तीन टीमें तकनीकी साक्ष्य जुटाने में लगी थीं। जांच के दौरान जेल में बंद एक आरोपी से महत्वपूर्ण सुराग मिला। एक संदिग्ध मोबाइल नंबर एक्टिव मिला, जिसके लोकेशन ट्रैक करते हुए पुलिस उरतुम पहुंची, जहां कारोबारी की कार बरामद हुई।


पुलिस के अनुसार आरोपी वहां से स्कॉर्पियो और फिर आई-20 कार बदलकर उत्तर प्रदेश की ओर भाग रहे थे। बिलासपुर पुलिस ने यूपी एटीएस को अलर्ट किया। संयुक्त कार्रवाई में मिर्जापुर के अहरौरा थाना क्षेत्र से चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।


पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने वारदात से पहले पूरी योजना बनाई थी। वारदात में इस्तेमाल बाइक चार दिन पहले तथा कार एक दिन पहले चोरी की गई थी। बाइक अंबिकापुर में पदस्थ नगर सैनिक राकेश चौबे की बताई जा रही है, जिसकी चोरी की रिपोर्ट मैनपाट थाने में दर्ज है। वहीं सफेद कार जांजगीर जिले के अकलतरा से चोरी हुई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी सीपत क्षेत्र में किराए के मकान में रहकर योजना बना रहे थे।



दो माह पूर्व 19 दिसंबर को जबड़ापारा में एक होटल कारोबारी से पिस्टल दिखाकर लूट की कोशिश की गई थी। इस मामले में गगनदीप बंसल को गिरफ्तार किया गया था, जबकि उसका एक साथी फरार हो गया था। पुलिस के अनुसार गगनदीप पहले तिहाड़ जेल में बंद रहा है, जहां उसकी पहचान गिरोह से हुई थी। मोबाइल टावर से मिले नंबर की जानकारी इस मामले में अहम साबित हुई।

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Author: Deepak Mittal

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