डां आम्बेडकर मण्डल दमोह द्वारा बाबा साहब डां आम्बेडकर को श्रध्दांजलि दी गई

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दमोह(बालाघाट) भारतीय संविधान के शिल्पकार, विश्व रत्न, बोधिसत्व, सिम्बॉल ऑफ दी नॉलेज,नारियों के मुक्तिदाता बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर के68वे महापरिनिर्वाण दिवस पर प्रज्ञा दीप बुध्दविहार दमोह प्रांगण मे स्थित आदम्यकद बाबा साहब प्रतिमा के समक्ष डां आम्बेडकर मण्डल बौध्द समाज द्वारा पूज्य भंते बोधि धम्म जी के सानिध्य मे पूजा अर्चना, व उनके धम्म आचरण का संकल्प लेकर , दो मिनट का मौन धारण कर बाबा साहब को पुण्य स्मरण करते हुये, विनम्र श्रदांजलि दी गई ! इस अवसर पर आल इंडिया समता सैनिक दल के क्षेत्रीय सचिव आयु. एस. आर. उके ने अपने सम्बोधन मे कहा कि,बाबा साहब ने अपने जीवन मे कमजोर,दलित ,पिछड़े,शोषित,वंचित वर्ग के लोगों के उत्थान एवं समाज में व्याप्त बुराइयों को मिटाने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किये तथा श्रमिकों, किसानों, कर्मचारियों और महिलाओं के अधिकारों को प्राथमिकता दी।

बाबा साहब अम्बेडकर जी के महापरिनिर्वाण दिवस पर उनके बताये संवैधानिक कृत्यों को जीवन मे आत्मसात कर सामाजिक वैमनस्यता को दूर करने का प्रयास करे। उनके अंतिम शब्द थे- मै बहुत मुश्किल से इस कारंवा को इस स्थिति तक लाया हूं, जहाँ यह आज दिखाई दे रहा है! इस कारंवा को आगे बढने ही देना, चाहे कितनी ही बाधाएं, रुकावटें या परेशानीयां इसके रास्ते मे क्यो न आये! यदि मेरे लोग, मेरे सेनापति इस कारंवा को आगे नही ले जा सके, तो इसे इसी दशा मे छोड देना, पर किसी भी हालत मे कारंवा को पीछे मत जाने देना। बाबा साहेब ने कहा था। बाबा साहब ने कहा था कि हमे अपनी एकता मजबूत बनाकर अखण्ड भारत का निर्माण करना है। कार्यक्रम मे सर्व सम्मानीय तेजलाल उके, सुमरन लाल खोब्रागढे,हरिशंकर भेलावे, सुख चैन सत्यटके, आदूराम मेश्राम, छबिलाल कोल्हेकर, परषोतम रामटेके, आशीष उके, बलीराम रामटेके सहित रमाबाई महिला मण्डल की सभी उपासिकाएं एवं बच्चों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

संकलनकर्ता -एस.आर.उके

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Author: Deepak Mittal

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