विशेष संवाददाता जया अग्रवाल, बिलासपुर (C.G)
बिलासपुर : सुबह 5 बजे का समय। स्टेशन पर सैकड़ों यात्री टिकट के इंतज़ार में कतार में खड़े हैं। ट्रेन छूटने की घड़ी नज़दीक है, लेकिन टिकट लेने की उम्मीद दूर। क्योंकि टिकट बुकिंग के लिए सिर्फ एक ही खिड़की खुली है, वह भी ऑफलाइन टिकट के लिए।
सीनियर सिटीजन, महिलाएं और तकनीक से अनभिज्ञ यात्री घंटों इंतज़ार कर रहे हैं। ऑनलाइन बुकिंग का विकल्प सभी के लिए सहज नहीं है, और ऑफलाइन खिड़की पर 200 से अधिक लोगों की भीड़ ने हालात को और जटिल बना दिया है।
यात्रियों का कहना है कि न तो सहयोग खिड़की पर कोई मदद मिल रही है, न ही इंक्वायरी काउंटर पर संतोषजनक जवाब। जब स्थिति पर सवाल उठाए गए तो जवाब मिला “यह सब उच्च स्तर के निर्णय हैं, इसमें हम कुछ नहीं कर सकते।

एक यात्री ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा, “अगर रेलवे प्रशासन में जरा भी संवेदनशीलता हो, तो टिकट बुकिंग खिड़कियां कम से कम भीड़भाड़ के समय 24 घंटे खोली जाएं, ताकि आम जनता को मूलभूत सुविधा मिल सके।”
फोटो में साफ देखा जा सकता है कि लंबी लाइन में खड़े यात्री परेशान हैं। कई यात्रियों ने ट्रेन छूटने की आशंका से टिकट लेना ही छोड़ दिया।
अब सवाल यह उठता है कि क्या यही हैं “अच्छे दिन”? क्या सरकार और रेलवे प्रशासन को जनता की परेशानी नहीं दिखती? आंखें होते हुए भी अंधेपन का स्वांग क्यों?
Author: Deepak Mittal









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