मेयर वीवी राजेश के कार्यभार संभालते ही गरमाई केरल की राजनीति, BJP काउंसलर पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप
तिरुवनंतपुरम: केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में बीजेपी के नए मेयर वीवी राजेश के पदभार संभालने के महज दो दिन बाद ही बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। CPI(M) विधायक और वट्टियूरकावु सीट से विधायक वीके प्रशांत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बीजेपी काउंसलर आर. श्रीलेखा ने उन्हें नगर निगम भवन में स्थित अपना ऑफिस खाली करने को कहा है।
“फोन कर कहा- ऑफिस खाली कीजिए”
वीके प्रशांत ने मीडिया से बातचीत में बताया कि बीजेपी काउंसलर आर. श्रीलेखा ने उन्हें फोन कर कहा कि सस्थमंगलम स्थित निगम भवन में उनका विधायक कार्यालय खाली किया जाए।
प्रशांत के मुताबिक, काउंसलर का तर्क था कि उनके लिए बनाए गए नए काउंसलर ऑफिस में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, इसलिए वे उस जगह का इस्तेमाल करना चाहती हैं, जहां विधायक का ऑफिस संचालित हो रहा है।
सात साल से चल रहा है विधायक कार्यालय
माकपा विधायक ने स्पष्ट किया कि उनका विधायक कार्यालय पिछले सात वर्षों से उसी निगम भवन में संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी एक बीजेपी काउंसलर उसी इमारत के एक हिस्से का इस्तेमाल कार्यालय के रूप में करता रहा है।
प्रशांत ने बताया कि जब वे स्वयं तिरुवनंतपुरम के मेयर थे, तब वार्ड काउंसलरों को कार्यालय देने का निर्णय लिया गया था। विधायक बनने के बाद उन्होंने निगम में आवेदन देकर विधिवत किराए पर वह स्थान लिया था।
“कानून की प्रक्रिया को दरकिनार किया जा रहा”
प्रशांत ने आरोप लगाया कि निगम की तय प्रक्रिया के तहत किसी भी तरह की बेदखली के लिए कॉर्पोरेशन सेक्रेटरी को नोटिस जारी करना होता है, लेकिन यहां एक काउंसलर सीधे विधायक को फोन कर ऑफिस खाली करने का दबाव बना रही है।
उन्होंने कहा,
“यह तरीका वैसा है, जैसा थाने में मामलों को हैंडल किया जाता है। यह पूरी तरह असंवैधानिक और सत्ता का दुरुपयोग है।”
‘बुलडोजर राजनीति’ का आरोप
माकपा विधायक ने इस पूरे घटनाक्रम की तुलना ‘बुलडोजर राज’ से करते हुए कहा कि
“बीजेपी उत्तर भारत के कुछ राज्यों में जिस तरह की राजनीति कर रही है, वही अब तिरुवनंतपुरम में दोहराई जा रही है।”
अतिरिक्त जगह इस्तेमाल करने की बात मानी
जब उनसे पूछा गया कि क्या विधायक कार्यालय ने काउंसलर के लिए तय जगह पर कब्जा किया है, तो प्रशांत ने स्वीकार किया कि लोगों की संख्या अधिक होने के कारण कुछ अतिरिक्त जगह का इस्तेमाल किया जा रहा है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि
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काउंसलर का ऑफिस उसी भवन में मौजूद है
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कमरे के बाहर नेम बोर्ड भी लगा है
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काउंसलर उस स्थान का बहुत कम उपयोग करती हैं और ज्यादातर निगम कार्यालय से काम करती हैं
तिरुवनंतपुरम में बढ़ता सियासी तापमान
गौरतलब है कि बीजेपी ने हालिया स्थानीय निकाय चुनाव में 101 में से 50 सीटें जीतकर तिरुवनंतपुरम नगर निगम की सत्ता हासिल की है। सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद सामने आए इस विवाद ने केरल की राजनीति को और गरमा दिया है।
अब सवाल यह है कि क्या यह प्रशासनिक जरूरत है या सत्ता के दम पर दबाव की राजनीति? आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने के आसार हैं।
Author: Deepak Mittal









