दुर्ग: जिले में कृषक पंजीयन की धीमी प्रगति पर कलेक्टर अभिजीत सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर पात्र किसान का पंजीयन प्राथमिकता से सुनिश्चित किया जाए।
कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने कृषक पंजीयन से लेकर राजस्व वसूली, सीमांकन, नक्शा बटांकन और नामांतरण जैसे मामलों की स्थिति का गहन विश्लेषण किया।
कलेक्टर ने कहा कि कृषक पंजीयन कृषि क्षेत्र के डिजिटलीकरण की दिशा में एक अहम पहल है, जिससे योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 1,14,000 किसानों ने पंजीकरण कराया था, जबकि इस वर्ष अभी तक केवल 63,435 किसान ही पंजीकृत हो सके हैं। इसे लेकर उन्होंने विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।
बैठक की मुख्य बातें:
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किसान स्वयं, मोबाइल ऐप, CSC या पटवारी की मदद से पंजीयन कराएं
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कृषक पंजीयन से भूमि रिकॉर्ड स्वतः अपडेट होगा
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वारिसान, खरीदी-बिक्री, बंटवारा आदि से जुड़े मामलों में अब होगा डिजिटल सुधार
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अविवादित नामांतरण, सीमांकन, डायवर्सन आदि कार्यों को तय समय में पूर्ण करें
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डिजिटल हस्ताक्षर, आधार व मोबाइल नंबर की प्रविष्टि अनिवार्य रूप से प्रतिदिन अपडेट हो
धान खरीदी और बाढ़ राहत पर भी फोकस
कलेक्टर ने बताया कि जिले में 87 धान खरीदी केंद्र संचालित हैं और नए केंद्रों के लिए गाँवों के समीप भूमि चिन्हित की जा रही है।
जलभराव और बाढ़ की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अस्थायी राहत शिविरों की पहचान व समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
लंबित प्रकरणों का तत्काल निराकरण हो
उन्होंने दो टूक कहा कि राजस्व से जुड़ा कोई भी मामला लंबित नहीं रहना चाहिए। सभी तहसीलदारों और राजस्व अधिकारियों को उनके न्यायालयों में लंबित मामलों की विस्तृत जानकारी देने के निर्देश दिए।
फौती नामांतरण, नजूल पट्टा, भूमि आबंटन, भू-अर्जन और मुआवजा भुगतान के प्रकरणों में तेज कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा गया।
कोर्ट केसों को गंभीरता से लें और आदेश पत्रों की समय पर समीक्षा कर नियमानुसार त्वरित कार्यवाही करें।
बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी
ADM वीरेन्द्र सिंह, संयुक्त कलेक्टर हरवंश मिरी और लता उर्वशा, SDM लवकेश ध्रुव, सोनल डेविड, महेश राजपूत, डिप्टी कलेक्टर उत्तम ध्रुव, सिल्ली थॉमस, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

Author: Deepak Mittal
