कमल किशोर गंगराले, आरोपी चालक ने पूछताछ में स्वीकारा कृत्य, कर्मचारियों में आक्रोश
एनआईसी के जिला परियोजना प्रबंधक के हीरो होंडा वाहन का पावर कनेक्टर निकालने का आरोप, अपर कलेक्टर ने जारी किया कारण बताओ नोटिस
बालोद,, पूर्व से विवादित वाहन चालक कमल किशोर गंगराले हमेशा से विवादित रहे हैं और इस बार उन्होंने अपने कर्मचारियों के दो पहिया वाहन पर चोरी की नीयत से छेड़छाड़ किया,इसके बाद बालोद जिला कलेक्टर में कर्मचारियों के बीच काफी आक्रोश देखा जा रहा है


जिला कलेक्टर कार्यालय बालोद में पदस्थ कर्मचारियों के बीच उस समय हड़कंप मच गया, जब कार्यालय परिसर में खड़े एक कर्मचारी के हीरो होंडा दोपहिया वाहन से कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आया। शिकायत के बाद कार्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, जिसमें पूरी घटना रिकॉर्ड होने की बात सामने आई। प्रशासनिक जांच के दौरान आरोपी वाहन चालक से पूछताछ की गई और अपर कलेक्टर द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के अनुसार उसने वाहन के साथ छेड़छाड़ किए जाने की बात स्वीकार की। घटना के बाद जिला कलेक्टर कार्यालय के कर्मचारियों में भारी नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 17 जुलाई को जिला कलेक्टर कार्यालय के एनआईसी शाखा में जिला परियोजना प्रबंधक (ई-डार) टिकेश्वर कुमार देशमुख ने लिखित शिकायत में बताया कि 16 जुलाई 2026 को उनका हीरो होंडा दोपहिया वाहन क्रमांक CG07 LS 6647 कलेक्टर कार्यालय परिसर की पार्किंग में खड़ा था।
आरोप है कि उसी दौरान कार्यालय के वाहन चालक कमल किशोर गंगराले ने वाहन के पावर प्लग (कनेक्टर) को निकाल दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस हरकत के कारण उन्हें अनावश्यक मानसिक तनाव, समय की बर्बादी तथा आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
शिकायत प्राप्त होने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराई। इसके बाद आरोपी चालक से पूछताछ की गई। अपर कलेक्टर द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में उल्लेख किया गया है कि पूछताछ के दौरान संबंधित चालक ने वाहन के साथ छेड़छाड़ किए जाने की बात स्वीकार की। नोटिस में कहा गया है कि यह कृत्य प्रथम दृष्टया शिकायतकर्ता को अनावश्यक रूप से परेशान करने वाला तथा शासकीय सेवक के आचरण नियमों के विपरीत प्रतीत होता है।
कारण बताओ नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी कर्मचारी का यह व्यवहार छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के विपरीत है। नोटिस के माध्यम से 24 घंटे के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिला कलेक्टर कार्यालय के कर्मचारियों के बीच घटना को लेकर तीखी चर्चा शुरू हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि कार्यालय परिसर में ही किसी कर्मचारी के निजी वाहन के साथ इस प्रकार की छेड़छाड़ होती है तो यह गंभीर चिंता का विषय है। कर्मचारियों ने निष्पक्ष जांच के साथ दोषी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
कर्मचारियों का यह भी कहना है कि यदि कार्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे नहीं होते तो घटना का खुलासा करना कठिन हो सकता था। कर्मचारियों के अनुसार इस मामले में “तीसरी आंख” बने सीसीटीवी कैमरों ने सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
टिकेश्वर कुमार देशमुख, शिकायतकर्ता कहते हैं कि “मैंने पूरे मामले की लिखित शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। कार्यालय परिसर में किसी कर्मचारी के निजी वाहन के साथ इस तरह की हरकत अस्वीकार्य है। प्रशासन से अपेक्षा है कि दोषी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
कमल किशोर गंगराले, आरोपी वाहन चालक का कहना है कि
“मैं अपना पक्ष विभाग के समक्ष लिखित रूप से प्रस्तुत करूंगा। विभाग जो भी निर्णय करेगा, उसका पालन करूंगा।”
जिला कलेक्टर कार्यालय के विभिन्न कर्मचारी सामूहिक रूप से कहते हैं कि
“कार्यालय परिसर में कर्मचारियों की सुरक्षा और उनकी निजी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि कोई कर्मचारी जानबूझकर इस प्रकार का कृत्य करता है तो उसके विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।”
जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि “मामले की जांच उपलब्ध साक्ष्यों एवं संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर नियमानुसार की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद सेवा नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
Author: Deepak Mittal









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