“राष्ट्रीय मंच पर चमका बालोद: डीएमएफटी में बेहतर प्रेजेंटेशन ,और आइडियाज़ देने के लिए बालोद जिला कलेक्टर दिव्या मिश्रा को सम्मानित किया गया

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दीपक मितल प्रधान संपादक छत्तीसगढ़

बालोद: खनन प्रभावित क्षेत्रों के डीएमएफटी में बेहतर प्रेजेंटेशन और आइडियाज़ देने के लिए सम्मानित किया गया समावेशी विकास और पारदर्शिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए बालोद जिले की कलेक्टर दिव्या मिश्रा को राष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। यह सम्मान हाल ही में नई दिल्ली स्थित स्कोप कन्वेंशन सेंटर में आयोजित “नेशनल डीएमएफ वर्कशॉप” के दौरान प्रदान किया गया। जब नेतृत्व दूरदृष्टि से जुड़ता है और सेवा भाव से सशक्त होता है, तो परिणाम केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहते वे समाज की आत्मा को छूते हैं। बालोद की कलेक्टर दिव्या मिश्रा आज इसी दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण बनकर उभरी हैं।

डीएमएफटी में बेहतर प्रेजेंटेशन ,और आइडियाज़ देने के लिए सम्मानित किया गया
डीएमएफ फंड के पारदर्शी और जनहितैषी उपयोग के लिए उन्हें हाल ही में दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया, जिसने न केवल बालोद जिले को गर्व से भर दिया, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की कार्यशैली को राष्ट्रीय आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया।
नई दिल्ली स्थित स्कोप कन्वेंशन सेंटर में आयोजित नेशनल डीएमएफ वर्कशॉप में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कलेक्टर दिव्या मिश्रा को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके कार्यों को सराहा। उनके मार्गदर्शन में बालोद ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, अधोसंरचना और आजीविका जैसे क्षेत्रों में डीएमएफ फंड का प्रभावशाली और नियोजित उपयोग कर एक विकास मॉडल स्थापित किया है।

दिव्या मिश्रा ने न केवल जिले की प्रशासनिक रूपरेखा को पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया, बल्कि हर वर्ग को साथ लेकर विकास की एक समावेशी कहानी लिखी। उनके नेतृत्व में बालोद अब केवल एक भौगोलिक नाम नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासन और सामाजिक न्याय का प्रतीक बन गया है।

दिल्ली से लौटने पर प्रेस क्लब बालोद ने कलेक्टर दिव्या मिश्रा का आत्मीय स्वागत कर उन्हें जिले की शान बताया। क्लब सदस्यों का कहना था कि “यह सम्मान एक महिला अधिकारी की दूरदर्शिता, संवेदनशीलता और सतत प्रयासों का फल है।”
दिव्या मिश्रा का यह सफर बताता है कि जब प्रशासनिक पद सेवा की भावना से प्रेरित हो, तो परिवर्तन केवल संभव नहीं, अनिवार्य हो जाता है। बालोद की जनता के बीच दिव्या मिश्रा सिर्फ एक कलेक्टर नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और भरोसे की प्रतीक बन चुकी हैं। उनके काम करने का तरीका नीतिगत दक्षता के साथ-साथ मानवीय संवेदना का भी परिचायक है।

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Author: Deepak Mittal

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