Lifestyles: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्ट्रेस एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन चुका है। विशेषज्ञ इसे “साइलेंट किलर” भी मानते हैं, क्योंकि इसके लक्षण अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं और कई बार लोगों को अपनी बिगड़ती सेहत का अंदाजा तक नहीं हो पाता। काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां, व्यक्तिगत रिश्ते, पुरानी दर्दनाक घटनाएं और आंतरिक स्वास्थ्य समस्याएं—ये सभी स्ट्रेस को बढ़ा सकते हैं।
स्ट्रेस क्या है?
स्ट्रेस किसी चुनौतीपूर्ण स्थिति या आसपास हो रही घटनाओं के प्रति शरीर और दिमाग की सामान्य प्रतिक्रिया है। लेकिन जब यह लंबे समय तक बना रहे या बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो इसे “डिस्ट्रेस” कहा जाता है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब व्यक्ति को लगता है कि वह परिस्थितियों को संभालने में असमर्थ है। लंबे समय तक बना रहने वाला स्ट्रेस शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर बुरा असर डाल सकता है।
स्ट्रेस के फिजिकल लक्षण
हेल्थ वेबसाइट WebMD के अनुसार, स्ट्रेस के दौरान शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें शामिल हैं—
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बार-बार सिरदर्द
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चक्कर आना
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जबड़ा भींचना या दांत पीसना
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कंधे, गर्दन और पीठ में दर्द
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शरीर में जकड़न या मांसपेशियों में खिंचाव
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सीने में दर्द या भारीपन
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हार्ट रेट बढ़ना
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सांस लेने में तकलीफ
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अत्यधिक थकान महसूस होना
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सामान्य से ज्यादा या कम नींद आना
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पेट खराब रहना, डायरिया या कब्ज
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जी मिचलाना
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सेक्स की इच्छा या क्षमता में कमी
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बार-बार सर्दी-जुकाम या इन्फेक्शन होना
कब लें डॉक्टर की सलाह?
अगर आप इनमें से एक या अधिक लक्षण लगातार महसूस कर रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में पर्याप्त आराम करें, खुद को तनावपूर्ण माहौल से दूर रखें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या मेडिकल एक्सपर्ट से सलाह लें।
समय रहते स्ट्रेस की पहचान और सही कदम उठाना ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।
Author: Deepak Mittal










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