अचानकमार को भाया पेंच की बाघिन का सफर, 400 किमी की यात्रा कर पहुंची थी यहां

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

 

जे के मिश्र / बिलासपुर – पेंच टाइगर रिजर्व की एक बाघिन ने पिछले साल लगभग 400 किमी का सफर तय कर अचानकमार टाइगर रिजर्व में अपना ठिकाना बना लिया है। यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी अन्य टाइगर रिजर्व से बाघ या बाघिन अचानकमार आई हो। इससे पहले, 2021 में बांधवगढ़ से एक बाघिन यहां आई थी, जिसका नाम रजनी था। वह उम्रदराज और घायल अवस्था में मिली थी और उसे कानन पेंडारी जू में लाकर उपचार किया गया, जहां उसकी मौत हो गई। फिलहाल झुमरी नाम की एक अन्य बाघिन भी अचानकमार में विचरण कर रही है।

पेंच की बाघिन ने अचानकमार को बनाया नया घर

अचानकमार टाइगर रिजर्व में पाई गई यह बाघिन, पेंच टाइगर रिजर्व की है, और वह पिछले सालभर से यहां की जंगलों में ही विचरण कर रही है। उसकी वापसी न होना यह संकेत देता है कि यहां की प्राकृतिक स्थितियां और भोजन की उपलब्धता उसे भा गई हैं, जिससे वह यही ठहर गई है।

एटीआर प्रबंधन और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के बीच अनुबंध

बाघिन की मौजूदगी का पता तब चला, जब डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर) ने अचानकमार टाइगर रिजर्व के बाघों का प्रोफाइल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की। एटीआर प्रबंधन और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के बीच पांच साल का अनुबंध हुआ है, जिसके अंतर्गत तकनीकी समर्थन और बाघों की जानकारी संकलित की जा रही है। पुराने रिकॉर्ड्स से मिलान करने पर एक बाघिन की पहचान स्पष्ट नहीं हो पाई, जिसके बाद इसे टाइगर सेल में जांच के लिए भेजा गया। यहां पता चला कि यह बाघिन पेंच टाइगर रिजर्व की है। पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने पुष्टि की कि यह बाघिन 2022 से पेंच में नहीं देखी गई थी।

बाघिन का 400 किमी का सफर

माना जा रहा है कि यह बाघिन बीच के समय में कान्हा के जंगलों में रही होगी और वहां से यात्रा करते हुए अचानकमार पहुंची। उसने 2022 में पेंच से यात्रा शुरू की और 2023 में अचानकमार टाइगर रिजर्व में देखी गई। सबसे पहले इसकी तस्वीर शीतऋतु की गणना के दौरान सामने आई थी।

बाघ कारीडोर में सुधार की जरूरत

दूसरे टाइगर रिजर्व से बाघों का अचानकमार में आना एक सकारात्मक संकेत है। इससे पहले कान्हा से बिलासपुर तक का कारीडोर माना जाता था, लेकिन अब इसका विस्तार पेंच तक हो गया है। इसके अलावा, ओडिशा और महाराष्ट्र के टाइगर रिजर्व से भी छत्तीसगढ़ में बाघों की आवाजाही हो रही है। वन विभाग को अब कारीडोर पर विशेष ध्यान देना होगा और बाघों की सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम करने की आवश्यकता है।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

August 2026
S M T W T F S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  

Leave a Comment