आदिवासी अंचलों में स्वच्छता के साथ सशक्तिकरण की नई इबारत, ई-रिक्शा से घर-घर कचरा संग्रहण कर आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं

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Deepak Mittal

दल्लीराजहरा/डौंडीलोहारा,,कभी रोजी-रोटी के लिए मजदूरी पर निर्भर रहने वाली आदिवासी अंचल की महिलाएं आज अपने परिश्रम, आत्मविश्वास और शासन की योजनाओं के सहयोग से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन रही हैं। स्वच्छ भारत मिशन, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन तथा जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) के सहयोग से पिंगाल, झरनटोला, खड़बततर, किल्लेकोड़ा, चिखली, बड़ेजुगेरा, कोडेकसा, गैजी सहित कई ग्राम पंचायतों में स्व-सहायता समूह की महिलाएं इलेक्ट्रिक (ईवी) कचरा संग्रहण वाहनों के माध्यम से घर-घर जाकर गीला एवं सूखा कचरा एकत्रित कर रही हैं।


यह पहल केवल गांवों को स्वच्छ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त भी बना रही है। अब ये महिलाएं नियमित आय अर्जित कर अपने परिवार की जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं।


ई-रिक्शा में गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग रखने की विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन किया जा रहा है। संग्रहित कचरे को एसएलआरएम (सॉलिड एंड लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट) केंद्रों तक पहुंचाया जाता है, जहां जैविक कचरे से खाद तैयार की जाती है तथा पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग कर उपयोग में लाया जाता है। इससे स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है।


महिलाओं को ई-रिक्शा संचालन के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षण के बाद वे पूरी दक्षता के साथ वाहन संचालित कर रही हैं। उनकी नियमित आय से बच्चों की पढ़ाई, परिवार का पालन-पोषण तथा घरेलू जरूरतें पहले की तुलना में अधिक सुगमता से पूरी हो रही हैं। गांवों में उनका सामाजिक सम्मान भी लगातार बढ़ा है।


जिले के आदिवासी अंचलों में शुरू हुई यह पहल आज केवल स्वच्छता अभियान नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरक कहानी बन चुकी है। ई-रिक्शा की रफ्तार के साथ गांवों में स्वच्छता का संदेश पहुंच रहा है और महिलाओं के जीवन में आत्मसम्मान, आर्थिक मजबूती तथा उज्ज्वल भविष्य की नई उम्मीद भी आकार ले रही है।


स्व-सहायता समूह की महिला सदस्य लता बाई ने कहा—”पहले परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। मजदूरी से जैसे-तैसे घर चलता था। अब ई-रिक्शा चलाकर घर-घर कचरा संग्रहण का काम कर रही हूं। हर महीने नियमित आमदनी हो रही है। अब बच्चों की पढ़ाई और परिवार का खर्च बेहतर तरीके से चला पा रही हूं।”

महिला सदस्य समोतिन बाई ने कहा—”जब पहली बार ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण मिला तो थोड़ा डर लग रहा था, लेकिन अब आत्मविश्वास के साथ वाहन चला रही हूं। गांव के लोग भी हमारा सम्मान करते हैं। स्वच्छता अभियान से जुड़कर समाज सेवा करने का अलग ही संतोष मिलता है।”

महिला सदस्य निर्मला नेताम ने कहा—
“पहले कभी नहीं सोचा था कि एक दिन खुद वाहन चलाकर रोजगार कर सकूंगी। आज अपनी मेहनत से परिवार की आय बढ़ा रही हूं। शासन की इस योजना ने हमें नई पहचान और नया आत्मविश्वास दिया है।”
महिला सदस्य श्याम बाई ने कहा—
“हम केवल कचरा नहीं उठा रहे, बल्कि लोगों को स्वच्छता का महत्व भी समझा रहे हैं। अब अधिकांश परिवार गीला और सूखा कचरा अलग-अलग देने लगे हैं। इससे गांव साफ-सुथरे दिखने लगे हैं और लोगों में जागरूकता बढ़ी है।”
ग्राम पंचायत के सरपंच ईश्वर नेताम ने कहा कि “स्वच्छ भारत मिशन के तहत संचालित यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तन का मजबूत माध्यम बनी है। महिलाओं को रोजगार मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और गांवों में नियमित कचरा संग्रहण की व्यवस्था स्थापित हुई है। आने वाले समय में इसे और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।”
ग्राम पंचायत सचिव के डी मानिकपुरी ने कहा कि “गांवों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से स्वच्छता अभियान को नई गति मिली है। पंचायत लगातार लोगों को गीला एवं सूखा कचरा अलग-अलग देने के लिए प्रेरित कर रही है।”
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी ने कहा कि
“स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना भी है। जिला खनिज न्यास एवं राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक आजीविका से जोड़ा गया है। यह पहल स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है। जिले में इस मॉडल का लगातार विस्तार किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार मिल सके और प्रत्येक ग्राम पंचायत स्वच्छ एवं आत्मनिर्भर बन सके।”

जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पंकज देव कहते हैं कि
“डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। महिलाओं को प्रशिक्षण, संसाधन और रोजगार उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है। यह योजना स्वच्छता के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।”
सौरभ कुमार जनप्रतिनिधि ने कहा, “जब महिलाएं विकास की मुख्यधारा से जुड़ती हैं तो पूरा गांव आगे बढ़ता है। ई-रिक्शा आधारित कचरा संग्रहण व्यवस्था स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण का आदर्श मॉडल बन चुकी है।”
उपेंद्र कुमार साहू जनप्रतिनिधि ने कहा, “ग्रामीणों को चाहिए कि वे घरों से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग दें तथा स्वच्छता अभियान को जनआंदोलन बनाएं। शासन की योजनाओं का लाभ तभी सार्थक होगा जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाएगा।”

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Author: Deepak Mittal

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