सोलर कार्यों में पारदर्शिता का उदाहरण: जनपद सीईओ पर लगे आरोप निकले पूरी तरह निराधार, प्रशासन ने समय रहते लगाई थी रोक

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डौंडी लोहारा।,क्षेत्र में चर्चित तथाकथित “सोलर घोटाले” को लेकर जनपद पंचायत डौंडी लोहारा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) पर लगाए जा रहे आरोपों को प्रशासन ने पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि सोलर से जुड़े किसी भी कार्य में जनपद पंचायत या उसके सीईओ की कोई भूमिका नहीं रही है।


प्रशासन ने तथ्यात्मक जानकारी देते हुए बताया कि जैसे ही बिना अनुमति सोलर कार्यों की सूचना मिली, तत्काल सख्त कदम उठाते हुए ऐसे सभी कार्यों पर रोक लगा दी गई। दिनांक 09 अप्रैल 2025 को ही सभी ग्राम पंचायतों को स्पष्ट निर्देश जारी कर बिना कार्यादेश किसी भी प्रकार के सोलर कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

इसके बाद भी कहीं-कहीं गतिविधियां सामने आने पर 20 जून 2025 को पुनः कड़े निर्देश जारी किए गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 18 जून 2025 को सरपंचों और सचिवों की संयुक्त बैठक आयोजित कर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के माध्यम से दो टूक निर्देश दिए गए कि बिना स्वीकृति कोई भी कार्य नहीं किया जाए। नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।


इसके बावजूद सितंबर 2025 के प्रथम सप्ताह में कुछ स्थानों पर कार्य होने की जानकारी मिलने पर प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए 24 सितंबर 2025 को संबंधित सरपंच एवं सचिवों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए। लगातार निगरानी और प्रशासनिक सख्ती के चलते ऐसे सभी कार्यों पर पूर्ण विराम लग गया।


प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण के दौरान न तो कोई आधिकारिक शिकायत प्राप्त हुई, न ही किसी प्रकार की राशि का लेन-देन हुआ। चूंकि ये कार्य बिना प्रशासनिक स्वीकृति के किए जा रहे थे, इसलिए इनका कोई वैध रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है।


महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि सोलर से संबंधित कार्य केवल क्रेडा (CREDA) विभाग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, और किसी अन्य संस्था या एजेंसी को यह कार्य करने का अधिकार नहीं है। ऐसे में जनपद पंचायत या उसके अधिकारियों को इस मामले में जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह अनुचित और तथ्यहीन है।


जनपद पंचायत डौंडी लोहारा के सीईओ ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी पारदर्शिता, सजगता और प्रशासनिक अनुशासन के साथ किया है। समय-समय पर जारी किए गए आदेश और सख्त कार्रवाई इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने किसी भी अनियमितता को बढ़ावा नहीं दिया, बल्कि उसे रोकने के लिए तत्परता दिखाई।


इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि लगाए गए आरोप न केवल बेबुनियाद हैं, बल्कि प्रशासन की छवि धूमिल करने का एक असफल प्रयास मात्र हैं।

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Author: Deepak Mittal

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