नई दिल्ली: गर्मियों का मौसम शुरू होते ही कई लोगों को पेट से जुड़ी समस्याएं परेशान करने लगती हैं। इस दौरान भूख कम लगना, ठंडा खाने-पीने की इच्छा होना और मसालेदार या तला-भुना भोजन करने पर पेट व सीने में जलन की शिकायत आम हो जाती है। कई बार यह जलन सिरदर्द के रूप में भी महसूस होती है। विशेषज्ञों के अनुसार पेट और सीने की जलन का कारण केवल खान-पान ही नहीं, बल्कि शरीर में बढ़ता अम्ल और पित्त दोष भी हो सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार अम्लता केवल पेट की जलन तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह शरीर में पित्त और अम्ल की अधिकता का संकेत हो सकती है। जब शरीर में पित्त बढ़ जाता है तो पेट में जलन, खट्टी डकार, सिर भारी लगना और आंखों में जलन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में कुछ शीतल और पित्त को शांत करने वाले आयुर्वेदिक द्रव्यों का सेवन लाभकारी माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार शतावरी, शंख भस्म और मुलेठी जैसे तत्व शरीर की अग्नि को शांत करने और पित्त को संतुलित रखने में मददगार हो सकते हैं। शतावरी और शंख भस्म को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से पेट को ठंडक मिलती है और अम्ल बनने की मात्रा कम हो सकती है।
इसके अलावा मुलेठी और मिश्री का मिश्रण भी पेट और सीने की जलन को कम करने में सहायक माना जाता है। इसे गुनगुने दूध या पानी के साथ लेने से पेट की गर्मी कम होती है और गले तथा सीने में होने वाली जलन में राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि गर्मियों में अम्लता से बचने के लिए खान-पान और दिनचर्या का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। देर रात भोजन करने, अधिक मसालेदार और तला हुआ खाना खाने, ज्यादा चाय-कॉफी पीने, अत्यधिक तनाव लेने और लंबे समय तक खाली पेट रहने से पेट में अम्ल की समस्या बढ़ सकती है।
अम्लता से बचाव के लिए शाम को सूरज ढलने से पहले रात का भोजन करना बेहतर माना जाता है। भोजन के बाद तुरंत बैठने के बजाय हल्की सैर करना पाचन के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही गर्मियों में खिचड़ी, दलिया जैसे हल्के और ठंडक देने वाले भोजन को आहार में शामिल करने से पेट को आराम मिल सकता है।
Author: Deepak Mittal










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