रांची: Central Reserve Police Force (सीआरपीएफ) के महानिदेशक G. P. Singh ने झारखंड को 31 मार्च तक नक्सलमुक्त बनाने के लक्ष्य के मद्देनज़र पश्चिमी सिंहभूम जिले के तिरिलपोसी स्थित फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (एफओबी) का दौरा कर नक्सल विरोधी अभियान की रणनीति और ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की।
डीजी जीपी सिंह ने कैंप में तैनात जवानों के साथ ‘संवाद’ कार्यक्रम के तहत बातचीत की और उन्हें अभियान के अंतिम चरण के लिए पूरी मुस्तैदी के साथ तैयार रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि Jharkhand को नक्सलमुक्त बनाने के लिए 31 मार्च की समयसीमा तय की गई है और सुरक्षा बलों को हर हाल में यह लक्ष्य हासिल करना है।
इस दौरान डीजी ने जवानों को जंगलों में ऑपरेशन के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए छिपे हुए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) सबसे बड़ा खतरा होते हैं, इसलिए सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जाए, ताकि अभियान के दौरान “जीरो कैजुअल्टी” का लक्ष्य सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलियों के प्रभाव वाले कोर इलाकों में सुरक्षा बलों का लगातार दबाव बनाए रखना बेहद जरूरी है। डीजी ने जवानों की प्रतिबद्धता और साहस की सराहना करते हुए कहा कि उनका अटूट संकल्प ही झारखंड को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
गौरतलब है कि Chaibasa के सारंडा जंगलों में 22 जनवरी को सुरक्षा बलों ने राज्य में अब तक के सबसे बड़े एनकाउंटर में एक साथ 17 नक्सलियों को मार गिराया था। इस मुठभेड़ में एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष कमांडर अनल उर्फ पतिराम मांझी समेत कई हार्डकोर नक्सली मारे गए थे। इसके बाद से सुरक्षा बलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन और दबाव और तेज कर दिया है।
Author: Deepak Mittal










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