फ्रांस के साथ नई टैक्स ट्रीटी से बढ़ेगा निवेश, भारत का टैक्स बेस रहेगा सुरक्षित

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

नई दिल्ली: भारत और फ्रांस के बीच तीन दशक पुरानी डबल टैक्स अवॉयडेंस कन्वेंशन (DTAC) में संशोधन से द्विपक्षीय निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है। एक रिपोर्ट के अनुसार, संशोधित टैक्स ट्रीटी से फ्रांस की प्रमुख कंपनियों—जैसे Sanofi, Renault और L’Oréal—को लाभ मिल सकता है, जबकि भारत का टैक्स बेस भी सुरक्षित रहेगा।

भारत को कैपिटल गेन पर टैक्स का अधिकार

रिपोर्ट में कहा गया है कि नए प्रोटोकॉल के तहत भारत को कुछ लेन-देन, विशेषकर शेयरों की बिक्री से होने वाले कैपिटल गेन पर टैक्स लगाने का अधिकार मिला है। इसमें ऐसे ट्रांज़ैक्शन भी शामिल हैं, जहां किसी फ्रांसीसी कंपनी की भारतीय कंपनी में हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से कम हो।

ग्लोबल कंसल्टेंसी फर्म KPMG के हवाले से कहा गया है कि संशोधित ट्रीटी भारत की मौजूदा टैक्स नीति और अंतरराष्ट्रीय कर मानकों के अनुरूप द्विपक्षीय व्यापार ढांचे को फिर से संतुलित करती है। यह कदम भारत के टैक्स बेस को सुरक्षित रखने और स्थिर निवेश माहौल को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

डिविडेंड टैक्स ढांचे में बदलाव

नए समझौते के तहत:

  • भारतीय कंपनी में कम से कम 10% हिस्सेदारी रखने वाली फ्रांसीसी कंपनियों के लिए डिविडेंड टैक्स घटाकर 5% कर दिया गया है।

  • 10% से कम हिस्सेदारी वाली कंपनियों के लिए टैक्स दर 15% निर्धारित की गई है।

इसके अलावा, संशोधित प्रोटोकॉल में ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ (MFN) क्लॉज को हटा दिया गया है, जिससे फ्रांसीसी संस्थाएं भारत में कम टैक्स दर का स्वतः दावा नहीं कर सकेंगी।

सूचना आदान-प्रदान और BEPS प्रावधान

भारत के वित्त मंत्रालय के अनुसार, नए प्रोटोकॉल में सूचना के आदान-प्रदान के प्रावधानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपडेट किया गया है। साथ ही, टैक्स कलेक्शन में आपसी सहयोग को मजबूत करने के लिए नया अनुच्छेद जोड़ा गया है।

इसमें BEPS (Base Erosion and Profit Shifting) मल्टीलेटरल इंस्ट्रूमेंट (MLI) के प्रावधान भी शामिल हैं, जिन्हें दोनों देशों द्वारा पहले ही अनुमोदित किया जा चुका है।

रणनीतिक साझेदारी को मजबूती

Emmanuel Macron के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को “स्पेशल ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप” तक विस्तारित करने की घोषणा की थी। रक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और आर्थिक सहयोग के क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने पर सहमति बनी है।

आधिकारिक प्रक्रियाएं और कानूनी मंजूरी पूरी होने के बाद नया टैक्स प्रोटोकॉल प्रभावी हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच निवेश और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देगा।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

Leave a Comment