शाखकर्तन से हरियाली की रक्षा, संग्राहकों से वन संरक्षण की मजबूत साझेदारी

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Deepak Mittal

बालोद,वन संरक्षण, ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक सशक्त और प्रेरक पहल के रूप में आज तेंदूपत्ता शाखकर्तन कार्यशाला एवं संग्राहक सम्मेलन का आयोजन मंगचुवा वनपरिक्षेत्र, लोहारा में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संग्राहकों को आग लगाकर पत्ते प्राप्त करने की परंपरागत पद्धति से हटाकर शाखकर्तन विधि के प्रति प्रशिक्षित करना रहा, ताकि बेहतर गुणवत्ता के तेंदूपत्ते प्राप्त हों और वनाग्नि की घटनाओं में प्रभावी कमी लाई जा सके।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा-अर्चना के साथ हुई।

इसके पश्चात जिला यूनियन बालोद के उपप्रबंध संचालक द्वारा शाखकर्तन कार्यशाला के अंतर्गत बूटा कटाई की प्रक्रिया, औजारों के उपयोग, सही तकनीक और सुरक्षित संग्रहण से संबंधित विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। संग्राहकों को बताया गया कि वैज्ञानिक पद्धति से की गई शाखकर्तन न केवल उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाती है, बल्कि जंगलों की प्राकृतिक संरचना और जैव विविधता को भी सुरक्षित रखती है।


कार्यक्रम को दिशा देने में वनमंडल अधिकारी अभिषेक अग्रवाल (डीएफओ) की भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही। उनके मार्गदर्शन में संग्राहक कार्ड, नए संग्राहकों के सर्वे, तथा छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं—जैसे छात्रवृत्ति और बीमा—की विस्तार से जानकारी दी गई।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वन विभाग का लक्ष्य केवल वनोपज संग्रह नहीं, बल्कि संग्राहकों की सुरक्षा, समृद्धि और सतत विकास है। उनके नेतृत्व में वन संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की मजबूत पहल देखने को मिली। संग्राहकों को धूप से बचाव के लिए टोपी का वितरण भी किया गया।


स्वास्थ्य सुरक्षा की मजबूत पहल
कार्यक्रम के दौरान निःशुल्क फाइलेरिया उपचार दवा वितरण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें संग्राहकों और ग्रामीणों को आवश्यक दवाइयों का वितरण किया गया। स्वास्थ्य विभाग और वन विभाग के समन्वय से हुए इस प्रयास में रोग की रोकथाम, समय पर उपचार और जागरूकता पर विशेष जोर दिया गया। लोगों को फाइलेरिया के लक्षण, बचाव के उपाय और नियमित दवा सेवन के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई, जिससे ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुरक्षा को नई मजबूती मिली।


वनाग्नि रोकथाम पर विशेष सत्र में आग से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई और समुदाय आधारित वन संरक्षण मॉडल को मजबूत करने का आह्वान किया गया। इसके साथ ही जल संरक्षण–जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत कम लागत में सोख्ता (जल निकासी एवं भू-जल पुनर्भरण हेतु गड्ढा) निर्माण की विधि का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया, जिससे जल संचयन, भूजल संरक्षण और ग्रामीण सहभागिता को बढ़ावा मिला।


कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य राजा राम तारम, विधायक प्रतिनिधि गोविन्द चंद्राकर, वन समिति सभापति जनपद लोहारा राजेश्वरी टेकाम, जनपद सदस्य जागेश्वर दर्रो, जनपद सदस्य देव राणा, भाजपा मंडल अध्यक्ष रेंगाडबरी उत्तरा कुमार चुरेंद्र, लघु वनोपज सहकारी समिति अध्यक्ष रेंगाडबरी थानसिंह रावटे, कुशल मंडावी (टेकापार), झनक मंडावी (बंजारी), नेतराम भांडेकर (लोहारा), चैत राम तुलावी (पीपरखार), अमोली राम (लोहारटोला) के साथ समिति प्रबंधक, फड़ मुंशी, तेंदूपत्ता संचालक मंडल के सदस्य, संग्राहक ग्रामीण तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


कार्यक्रम ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि जब संग्राहक, समाज और वन विभाग एकजुट होकर कार्य करते हैं, तब वन संरक्षण केवल प्रशासनिक कार्य नहीं बल्कि सामाजिक आंदोलन बन जाता है। मंगचुवा–लोहारा क्षेत्र में आयोजित यह सम्मेलन सतत वन प्रबंधन, जनस्वास्थ्य, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में एक मजबूत, सकारात्मक और दूरदर्शी पहल के रूप में स्थापित हुआ है।

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Author: Deepak Mittal

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