रायपुर: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की जेल से रिहाई के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जश्न उस वक्त खौफनाक मंजर में बदल गया, जब आतिशबाजी और भीड़ की भगदड़ में एक महिला पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गई। इस घटना ने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
जश्न में दब गई पत्रकार, सीने में आया फ्रैक्चर
जानकारी के मुताबिक, चैतन्य बघेल की रिहाई के दौरान जेल गेट के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जमा थी। इसी दौरान हुई अंधाधुंध आतिशबाजी और धक्का-मुक्की में FM न्यूज की ब्यूरो चीफ चित्रा पटेल भीड़ में फंस गईं। बताया जा रहा है कि भगदड़ के दौरान उन्हें गेट के पास धकेल दिया गया, जहां वे दब गईं।
माइक-आईडी टूटे, मोबाइल गायब
घटना के दौरान चित्रा पटेल का माइक, आईडी कार्ड और मोबाइल गिरकर टूट गया, जबकि एक मोबाइल भीड़ में चोरी हो गया। आरोप है कि उनके पैर को रौंदा गया और सीने में माइनर फ्रैक्चर आया है। यही नहीं, मौके पर मौजूद एक अन्य पत्रकार का मोबाइल रिसीवर भीड़ में गिरकर गायब हो गया, जबकि कई पत्रकारों को हाथों में हल्की चोटें आई हैं।
बीजेपी नेता का तीखा सवाल
इस पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी नेता उज्जवल दीपक ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया—
“पत्रकारों के साथ ऐसा सलूक??”
उनकी पोस्ट के बाद यह मामला और गरमा गया है।
सवालों के घेरे में सुरक्षा और व्यवस्था
रिहाई के जश्न में बदले इस हादसे ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या राजनीतिक आयोजनों में मीडिया की सुरक्षा सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गई है? अब देखना होगा कि इस मामले में प्रशासन और संबंधित पक्ष क्या कार्रवाई करते हैं।
Author: Deepak Mittal










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