नशा छुड़ाने की जगह नशे का अड्डा बना सेंटर! अस्पताल में खुला बड़ा खेल

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दुर्ग: नशा मुक्ति के नाम पर संचालित एक सेंटर में ऐसा खेल चल रहा है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुपेला स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के नशा मुक्ति (OST) सेंटर में इलाज के बजाय मरीजों के नशा सेवन करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां दी जाने वाली दवाइयों का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है।

शनिवार को जब भाजपा जिला महिला मोर्चा अध्यक्ष स्वीटी कौशिक सुपेला अस्पताल पहुंचीं, तो उन्होंने एक मरीज को OST की दवाइयां अस्पताल परिसर से बाहर ले जाते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद जो सामने आया, उसने सभी को चौंका दिया।

स्वीटी कौशिक का आरोप है कि OST सेंटर में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। तय नियमों के अनुसार नशा छुड़ाने की दवाइयां मरीजों को अस्पताल परिसर में ही सेवन कराई जानी चाहिए, लेकिन यहां दवाइयां सीधे मरीजों के हाथों में दे दी जा रही थीं। जांच के दौरान चार मरीजों के पास से इव्लिन की चार शीशियां, करीब चार सीसी दवा और OST पाउडर की बड़ी मात्रा बरामद की गई।

आरोप है कि इन दवाइयों का इस्तेमाल मरीज इंजेक्शन के जरिए नशा करने में कर रहे थे। यानी नशा छुड़ाने का केंद्र खुद नशे का जरिया बनता जा रहा है।

स्वीटी कौशिक ने बताया कि लंबे समय से स्थानीय लोग OST सेंटर को हटाने या दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं। सेंटर के आसपास नशाखोरी, हंगामा और असामाजिक गतिविधियों के कारण अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों, खासकर महिलाओं को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नशा छुड़ाने के नाम पर यहां सस्ता और आसान नशा उपलब्ध हो रहा है, जिससे लोगों की लत कम होने के बजाय और बढ़ती जा रही है।

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Author: Deepak Mittal

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