रायबरेली (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के रायबरेली से सामने आई एक सनसनीखेज बैंकिंग धोखाधड़ी ने पूरे वित्तीय तंत्र की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर की बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) मुख्य शाखा में जाली दस्तावेजों के सहारे 9 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी लोन घोटाला सामने आया है। इस मामले ने बैंकिंग गलियारों से लेकर पुलिस महकमे तक हड़कंप मचा दिया है।
ऐसे खुला फर्जीवाड़े का पिटारा
यह मामला तब उजागर हुआ जब बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय कार्यालय ने कुछ खातों की गोपनीय जांच करवाई। जांच में सामने आया कि वर्ष 2024 और 2025 के दौरान कुल 48 लोगों ने अपनी असली पहचान छिपाकर और नकली दस्तावेजों के आधार पर पर्सनल लोन हासिल किया।
फर्जीवाड़े की कुल रकम 9 करोड़ 2 लाख 50 हजार रुपये आंकी गई है। क्षेत्रीय कार्यालय की रिपोर्ट के आधार पर बैंक के मुख्य प्रबंधक मुकेश ने सोमवार देर शाम रायबरेली सदर कोतवाली में सभी 48 आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई।
बैंक कर्मचारी भी शक के घेरे में
बैंक से पर्सनल लोन लेने की प्रक्रिया बेहद सख्त होती है—फिजिकल वेरिफिकेशन, सैलरी सर्टिफिकेट, गारंटर और केवाईसी जैसे कई स्तरों की जांच होती है। ऐसे में 48 फर्जी लोन का पास होना बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं माना जा रहा।
जांच के अहम सवाल:
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लोन से पहले आवेदकों का फिजिकल सर्वे हुआ या नहीं?
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जाली दस्तावेजों को असली कैसे मान लिया गया?
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किन अधिकारियों ने फाइलों को मंजूरी दी?
एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,
“बिना बैंक कर्मियों की शह के इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं है। आमतौर पर ऐसे मामलों में एक सक्रिय गिरोह होता है, जो अंदरूनी संपर्कों के जरिए कागजी खानापूर्ति पूरी कराता है।”
ये इलाके और नाम आए रडार पर
एफआईआर में शामिल 48 आरोपी सलोन, डलमऊ, बछरावां, रतापुर, प्रगतिपुरम और सिविल लाइंस जैसे इलाकों से ताल्लुक रखते हैं। प्रमुख नामों में उत्तम चक्रवर्ती, उमाशंकर, शिवरानी, अर्चना मिश्रा, बबलू राठौर और साबिर शामिल हैं।
पुलिस की सख्ती, बैंक की चुप्पी
एसपी डॉ. यशवीर सिंह के निर्देश पर कोतवाली प्रभारी जितेंद्र कुमार सिंह मामले की जांच कर रहे हैं। पुलिस का दावा है कि विवेचना के दौरान कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर, बैंक प्रबंधन ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है, जिससे बैंक के भीतर मचे हड़कंप का अंदाजा लगाया जा रहा है।
नियमों के मुताबिक पर्सनल लोन के लिए एनओसी, पीएफ विवरण, केवाईसी और दो गवाहों की पुष्टि अनिवार्य होती है। अब पुलिस इसी बात की तह तक जाने में जुटी है कि किस स्तर पर नियमों को ताक पर रखा गया।
Author: Deepak Mittal










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