खैरागढ़: जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर ग्राम खैरबना में राजपरिवार के तत्वावधान में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के दौरान आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री उर्फ ‘चाय वाले बाबा’ के बेबाक बयान ने धार्मिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने सनातन, कथावाचन और कथित चमत्कारों पर खुलकर अपनी बात रखी।
आचार्य शास्त्री ने कहा कि आज देश में सनातन हवा में तैर रहा है, लेकिन धर्म और पाखंड के बीच फर्क समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, “पहले सौ लोग कथा सुनते थे तो भीतर अध्यात्म जागता था, आज लाखों सुन रहे हैं, फिर भी अध्यात्म नहीं जाग रहा।” उनके मुताबिक आज कथा श्रवण नहीं, प्रदर्शन बनती जा रही है और अध्यात्म की जगह आडंबर ने ले ली है।
कथावाचकों पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने उन दावों पर सवाल उठाए, जिनमें स्वयं को निःशुल्क बताकर कथाएं करने की बात कही जाती है। आचार्य शास्त्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि लाखों की भीड़, हवाई यात्रा, पांच सितारा इंतजाम और करोड़ों के पैकेज अपने आप में आडंबर का प्रमाण हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि “चार हिंदुत्व टिप्पणियां कर हीरो बन जाना और दूसरे धर्मों पर बयानबाज़ी करना सनातन को आगे नहीं बढ़ाता।”
बागेश्वर धाम सरकार पर तीखा बयान
पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम सरकार) को लेकर पूछे गए सवाल पर आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री ने स्पष्ट कहा कि उनकी नजर में वे सिर्फ कथावाचक हैं, ज्योतिषी नहीं। उन्होंने चमत्कार और ज्योतिष के बीच फर्क बताते हुए कहा कि “चावल देखकर भविष्य बताना मेरी सिद्धि और सनातन परंपरा का हिस्सा है, जो सदियों से चली आ रही है। चमत्कार कुछ और होता है, ज्योतिष कुछ और।”
‘चाय वाले बाबा’ के इन बयानों ने एक बार फिर कथावाचन, चमत्कार और सनातन परंपरा को लेकर चल रही बहस को तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि इस बयान पर संत समाज और धार्मिक संगठनों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
Author: Deepak Mittal










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