बिना लोहे के कैसे बना राम मंदिर, IIT रुड़की और CBRI के सिलेबस में शामिल होगा विषय

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बिना लोहे का इस्तेमाल किए पत्थरों से बने अयोध्या राम मंदिर के निर्माण के विषय को आईआईटी रुड़की और सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) के सिलेबस में शामिल किया जा सकता है।

सीबीआरआई संस्थान देश में बिल्डिंग साइंस और टेक्नोलॉजी का विकास और प्रचार करता है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने पिछले तीन दिनों में अयोध्या में आयोजित एक बैठक में दोनों संस्थानों को पांच वर्षों के वीडियो फुटेज सौंपने का निर्णय लिया है ताकि उन्हें अध्ययन सामग्री के रूप में तैयार किया जा सके और एक डॉक्यूमेंट्री में भी दिखाया जा सके।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बुधवार को बताया कि जैसे ही वह दिल्ली लौटेंगे, वह दोनों संस्थानों के प्रमुखों को आमंत्रित करेंगे और इस संबंध में उनके साथ एक विस्तृत समझौते पर हस्ताक्षर करने पर चर्चा करेंगे।

उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण के प्रत्येक दिन के वीडियो फुटेज को रिकॉर्ड करने के लिए मंदिर परिसर में पांच कैमरे लगाए गए हैं। अगस्त 2020 में आधारशिला रखने के दिन से लेकर, निर्माण के विभिन्न चरणों और संभवतः इस वर्ष दिसंबर में इसके पूरा होने तक, वीडियो में निर्माण का हर पल कैद है।

मिश्रा ने बताया, ‘विचार यह था कि मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को दर्शाने के लिए सभी संभावित और प्रासंगिक तस्वीरें ली जाएं।’ उन्होंने आगे कहा, “हमने आईआईटी रुड़की और सीबीआरआई के साथ बातचीत शुरू करने का फैसला किया है ताकि वे मंदिर निर्माण की तकनीक, खासकर बिना लोहे का इस्तेमाल किए पत्थर से, पर एक सिलेबस तैयार कर सकें। यह उनके सिलेबस का एक हिस्सा बन जाएगा।’

यह पूछे जाने पर कि फुटेज कैसे सौंपी जाएगी, मिश्रा ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘संस्थानों के साथ एक विस्तृत समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे क्योंकि फुटेज मंदिर ट्रस्ट का बौद्धिक संपदा अधिकार है।’

बुधवार को संपन्न हुई तीन दिवसीय ट्रस्ट बैठक में मंदिर के चल रहे निर्माण कार्य, राम मंदिर आंदोलन में भाग लेने वाले मृतकों के लिए ग्रेनाइट स्मारक, लगभग 10 एकड़ हरे-भरे वन क्षेत्र में पंचवटी के विकास की भी समीक्षा की गई, जो बंदरों और पक्षियों के लिए सुरक्षात्मक क्षेत्र होगा और इसमें एक जल निकाय भी होगा।

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Author: Deepak Mittal

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