अंग्रेजों ने भारत को 14-15 अगस्त की आधी रात को ही क्यों सौंपी सत्ता, आखिरी 24 घंटों में क्या हुआ था?

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14 और 15 अगस्त 1947 की आधी रात को जब देश के ज्यादातर लोग सो रहे थे, तब भारत अपनी आजादी की कहानी लिख रहा था। आज हर हिंदुस्तानी उस रात के बारे में जानना चाहता है जब हमारे पूर्वजों ने पहली बार एक आजाद मुल्क में सांस ली होगी।

कैसी रही होगी 14-15 अगस्त 1947 की रात? कैसा रहा होगा अपनी दिल्ली का नजारा? 14 से 15 अगस्त के बीच जब भारत-पाकिस्तान अलग हुए और आजादी मिली तो क्या हुआ। इस लेख में हम आपको 14 अगस्त और 15 अगस्त की आधी रात की कहानी बताने वाले हैं।

एक तरफ आजादी का उत्साह, दूसरी तरफ बंटवारे का दर्द

14 अगस्त, 1947 की शाम, दिल्ली में हर तरफ एक अजीब सा माहौल था जहां एक तरफ आजादी का उत्साह था, वहीं दूसरी तरफ बंटवारे का दर्द और हिंसा की आशंका भी थी। यह सिर्फ एक दिन नहीं था, बल्कि लगभग 200 सालों की गुलामी के बाद एक नए युग की शुरुआत थी। घड़ी की हर टिक-टिक इतिहास रच रही थी। उस रात, जो कुछ हुआ, वह सिर्फ एक समारोह नहीं था बल्कि एक राष्ट्र के पुनर्जन्म का गवाह था।

14 अगस्त की वो रात जब अंग्रेजों ने भारत को सत्ता सौंपी-

  • 14 अगस्त 1947 को जैसे-जैसे शाम ढल रही थी, दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन हॉल में गहमागहमी बढ़ रही थी। उस वक्त आज का संसद भवन का सेंट्रल हॉल ही कॉन्स्टिट्यूशन हॉल हुआ करता था तब भारतीय विधान परिषद के सदस्य एक ऐतिहासिक बैठक के लिए इकट्ठा हो रहे थे। उस वक्त बाहर जोरदार बारिश हो रही थी, लेकिन लोगों का उत्साह कम नहीं था।
  • हजारों लोग कॉन्स्टिट्यूशन हॉल के बाहर बारिश में भीगते हुए भी इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए इकट्ठा हुए थे। शाम 6 बजे से ही ब्रिटिश शासन का प्रतीक झंडा ‘यूनियन जैक’ उतार दिया गया था और हर तरफ तिरंगा फहराने की तैयारी हो रही थी।
  • रात 11 बजे बैठक शुरू हुई। इस बैठक की अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद कर रहे थे। बैठक में सभी नेताओं ने अपने विचार रखे। इसके बाद ठीक रात 12 बजे, जब दुनिया सो रही थी, तब भारत ने जागकर अपनी आजादी का स्वागत किया। उस समय, भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अपना ऐतिहासिक भाषण दिया।
  • नेहरू के भाषण को ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ के नाम से जाना जाता है जिसमें उन्होंने कहा था, ”कई साल पहले हमने नियति से एक वादा किया था, और अब वह समय आ गया है जब हम उस वादे को पूरी तरह से नहीं, लेकिन काफी हद तक निभाएंगे।” इस भाषण ने भारत के लोगों के दिलों में एक नई उम्मीद और जोश भर दिया।
  • इस समारोह में औपचारिक रूप से ब्रिटिश सरकार ने सत्ता भारत के प्रतिनिधियों को सौंपी। सत्ता के हस्तांतरण के प्रतीक के तौर पर पंडित नेहरू ने लॉर्ड माउंटबेटन से ‘सेंगोल’ ग्रहण किया था। भले ही यह एक खुशी का मौका था, लेकिन उस समय लॉर्ड माउंटबेटन भी चिंतित थे, क्योंकि उन्हें पता था कि एक तरफ जहां भारत अपनी आजादी का जश्न मना रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान में और पंजाब व बंगाल जैसे राज्यों में बंटवारे की आग लगी हुई थी। हालांकि, पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को ही मना चुका था।
  • 14-15 अगस्त, 1947 की रात भी एक विरोधाभास से भरी थी। एक तरफ जहां दिल्ली और देश भर में लोग आजादी का जश्न मना रहे थे, उसी समय, पंजाब और बंगाल में भयानक हिंसा हो रही थी। लाखों लोग अपने घर छोड़कर भाग रहे थे।
  • महात्मा गांधी भी इस जश्न में शामिल नहीं हुए थे, क्योंकि वे देश के दूसरे हिस्से में अनशन पर बैठे थे और विभाजन के दर्द को महसूस कर रहे थे। यह रात याद दिलाती है कि आजादी की कीमत बहुत भारी थी। यह सिर्फ एक राजनीतिक जीत नहीं थी, बल्कि करोड़ों लोगों के बलिदान और दर्द से भरी हुई थी।

छलनी हुआ था भारत मां का सीना

दरअसल, देश के इतिहास में 14 अगस्त की तारीख आंसुओं से लिखी गई है। यही वह दिन था, जब देश का विभाजन हुआ। 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान और 15 अगस्त, 1947 को भारत को एक पृथक राष्ट्र घोषित कर दिया गया। इस विभाजन में न केवल भारतीय उप-महाद्वीप के दो टुकड़े किए गए, बल्कि बंगाल का भी विभाजन किया गया और बंगाल के पूर्वी हिस्से को भारत से अलग करके पूर्वी पाकिस्तान बना दिया गया, जो 1971 के युद्ध के बाद बांग्लादेश बना। कहने को तो यह एक देश का बंटवारा था, लेकिन दरअसल यह दिलों का, परिवारों का, रिश्तों का और भावनाओं का बंटवारा था। भारत मां के सीने पर बंटवारे का यह जख्म सदियों तक रिसता रहेगा और आने वाली नस्लें तारीख के इस सबसे दर्दनाक और रक्तरंजित दिन की टीस महसूस करती रहेंगी।

आधी रात को ही क्यों मिली आजादी?

आज हर किसी के मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि देश को आधी रात को ही आजादी क्यों मिली। तो आपको बता दें कि इसके पीछे कई कारण थे-

  1. पहला कारण था- पाकिस्तान और भारत का बंटवारा। उस दौर के बड़े नेताओं और अंग्रेजी हूकुमत को डर था कि अगर दिन में आजादी दी गई और भारत पाकिस्तान का बंटवारा किया गया तो इससे दंगे भड़क सकते हैं। कानून व्यवस्था को कंट्रोल करना काफी मुश्किल हो जाएगा, इसी वजह से आधी रात का समय चुना गया था।
  2. दूसरा कारण ये बताया जाता है कि पाकिस्तान को भारत से एक दिन पहले यानी 14 अगस्त को आजादी मिली। वाइसराय लॉर्ड माउंटबेटन को 14 अगस्त को ही पाकिस्तान में स्थानांतरण के लिए कराची जाना था और देर रात भारत वापस लौटना था। यही वजह है कि फैसला किया गया कि भारत को आजादी आधी रात को ही दे दी जाएगी।

इसके अलावा तथ्य बताते हैं कि ब्रिटिश सरकार ने ऐलान किया था कि पाकिस्तान और भारत दोनों एक ही समय यानी 15 अगस्त 1947 को जीरो आवर पर स्वतंत्र होंगे। यही कारण है कि आधी रात को नई दिल्ली में भारत की आजादी का ऐलान हुआ।

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Author: Deepak Mittal

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