लैलूंगा : पत्रकार पर जानलेवा हमला करने की साजिश! पटवारी संगीता गुप्ता से जुड़ी खबर छापने पर मिली धमकी, शिकायत दर्ज….

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शैलेश शर्मा 9406308437नवभारत टाइम्स 24×7.in जिला ब्यूरो रायगढ़

रायगढ़। जिले के के लैलूंगा तहसील से एक हिला देने वाला मामला सामने आया है जिसने न सिर्फ पत्रकारिता की स्वतंत्रता को कठघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि जो सच बोलेगा, वो मारा जाएगा।

पत्रकार चंद्रशेखर जायसवाल, जो प्रेस क्लब लैलूंगा के अध्यक्ष भी हैं, को पटवारी संगीता गुप्ता से जुड़ी खबर छापने से रोकने के लिए न सिर्फ खुलेआम धमकियां दी गईं, बल्कि उनकी जान लेने की साजिश भी रची गई। यह कोई मामूली मामला नहीं, बल्कि एक गहरी और संगठित साजिश की ओर इशारा करता है जिसमें न सिर्फ पटवारी बल्कि उनके “समर्थक” भी शामिल हैं, जो खुद को सत्ता का हिस्सा मान बैठे हैं।

धमकी नहीं, पत्रकार को ‘साइलेंस’ करने की योजना थी : 25 जून 2025 को दोपहर 3:01 बजे पत्रकार चंद्रशेखर के मोबाइल पर कॉल आता है – नंबर था 7489711260. कॉलर खुद को पटवारी संगीता गुप्ता का आदमी बताता है और बोलता है:

“अगर खबर छापी तो सीधे ठोक देंगे… समझे ना? बहुत दूर नहीं जाना पड़ेगा।”

पत्रकार के इनकार करते ही गालियाँ शुरू हो जाती हैं और जान से मारने की धमकी दी जाती है। फिर एक-एक करके उसी नंबर से 5 अलग-अलग गुर्गे कॉल करते हैं ब्लॉक ऑफिस के पास बुलाकर फिजिकल अटैक की धमकी देते हैं।

इन लोगों पर है पत्रकार ने शक नाम बेहद गंभीर हैं :

  • संजय भगत – पटवारी
  • योगेन्द्र सोनवानी
  • राजेश शर्मा – निवासी रे गड़ी
  • शत्रुघ्न भगत – ग्राम झरण
  • राहुल सारथी – इंद्रानगर

इन सभी के नाम चंद्रशेखर ने अपनी लिखित शिकायत में दर्ज कराए हैं। सवाल ये है कि क्या ये लोग सिर्फ “समर्थक” हैं या ‘सुनियोजित हमलावर गिरोह’ का हिस्सा?

क्या छिपाना चाहती हैं पटवारी संगीता गुप्ता? : सवाल सीधा है आख़िर ऐसी क्या खबर है जो छापने से रोकने के लिए जान लेने तक की धमकी दी जा रही है?

  • क्या पटवारी संगीता गुप्ता किसी बड़े घोटाले, जमीन घपले या सरकारी लूट में शामिल हैं?
  • क्या लैलूंगा की आम जनता को लूटकर अपने आकाओं को खुश किया जा रहा है?

प्रशासन मौन! क्या ये चुप्पी मिलीभगत है?अब तक थाना लैलूंगा की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। पुलिस का रवैया सवालों के घेरे में है –

  • क्या आरोपियों को सत्ता संरक्षण प्राप्त है?
  • क्या पुलिस जानबूझकर समय बर्बाद कर रही है ताकि सबूत नष्ट हो जाएं?

अगर यही हाल रहा, तो समझा जाएगा कि प्रशासन भी इस हमले में बराबर का भागीदार है।

पत्रकार संगठनों की चेतावनी: अब आंदोलन होगा : लैलूंगा प्रेस क्लब, रायगढ़ जिला पत्रकार संघ समेत कई संगठनों ने इस घटना को पत्रकारिता पर हमला बताया है।

उनका कहना है :

“अगर शासन-प्रशासन ने 48 घंटे में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की, तो पूरे रायगढ़ में सड़क से सचिवालय तक जनआंदोलन होगा।”

पत्रकार चंद्रशेखर जायसवाल का ऐलान: “मैं डरने वाला नहीं”

“ये मेरी चुप्पी नहीं खरीद सकते। सच छापूंगा, क्योंकि यही मेरा धर्म है। अगर आज झुक गया, तो कल किसी और पत्रकार को गोली मार दी जाएगी।”

उन्होंने यह भी बताया कि कॉल डिटेल, ऑडियो रिकॉर्डिंग और नामों की पूरी सूची उनके पास है, जिसे वे जांच में सौंपने को तैयार हैं।

ये कोई मामूली मामला नहीं – ये लोकतंत्र की हत्या की कोशिश है!

जो लोग पत्रकार को सिर्फ इसलिए मारना चाहते हैं क्योंकि वह सच लिख रहा है, वे लोकतंत्र के गुनहगार हैं। और जो चुप हैं, वे साझेदार हैं।

अब देखना ये है कि क्या प्रशासन इस हमले को दबाने की कोशिश करेगा या जनता की आंखों में आंखें डालकर न्याय देगा।

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Author: Deepak Mittal

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