राइस मिलर पर 21.50 करोड़ की फर्जीवाड़े का आरोप, अग्रिम जमानत याचिका खारिज

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जे के मिश्र / बिलासपुर। गोरैला के राइस मिलर फकीरचंद अग्रवाल ने कस्टम मिलिंग के अंतर्गत एफसीआई में चावल जमा करने हेतु मार्कफेड में फर्जी बैंक गारंटी जमा कर राज्य शासन को 21.50 करोड़ रुपये की चपत लगा दी। पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद अग्रवाल ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, पेंड्रा रोड में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दिया था, जिसे सुनवाई के उपरांत कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

फकीरचंद अग्रवाल ने अपनी जमानत याचिका में कहा था कि गौरेला पुलिस ने गैर-जमानतीय धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिससे उन्हें गिरफ्तारी का खतरा है। इसके अलावा, उनके व्यवसायिक प्रतिद्वंद्वी मोबाइल पर इस संबंध में भ्रामक सूचनाएं फैला रहे हैं, जिसमें उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की बातें कही जा रही हैं। इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, पेंड्रारोड ने अग्रवाल के खिलाफ जमानतीय वारंट जारी किया है। कोर्ट में प्रस्तुत न होने पर जेल भेजे जाने की आशंका जताई जा रही थी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर गंभीर टिप्पणियां भी की हैं।

20 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी का खुलासा, पिता और पुत्रों पर FIR

जांच में सामने आया है कि वर्ष 2022-23 के खरीफ धान खरीदी सत्र में गोरैला के जिला विपणन कार्यालय में जमा की गई 20 नग बैंक गारंटी राशि कुल 20 करोड़ रुपये की थी, जिसे फर्जी पाया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार यह गारंटी कूट रचित प्रतीत हो रही है। इस मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक शिवराम टोप्पो और अन्य संबंधित फर्मों के मालिकों की संलिप्तता का संकेत भी मिला है। फकीरचंद अग्रवाल, श्याम फूड प्रोडक्ट्स के गोपाल कृष्ण अग्रवाल, श्याम मलिक और अन्य के खिलाफ धारा 420 और 34 के तहत गौरेला थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है और जांच जारी है।

जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि

वर्ष 2021-22 में गोरैला जिला विपणन कार्यालय में धान उठाने के लिए जमा की गई बैंक गारंटी के फर्जी होने की शिकायत के बाद जांच शुरू की गई। जांच में पाया गया कि श्याम इंडस्ट्रीज और अन्य फर्मों ने 19 बैंक गारंटी के जरिए 13.50 करोड़ रुपये जमा किए थे, जिनमें से 7.50 करोड़ रुपये की गारंटी फर्जी थी। इसी तरह श्याम फूड प्रोडक्ट्स और श्याम राइस मिल ने भी क्रमशः 6.50 करोड़ और 7.50 करोड़ रुपये की फर्जी गारंटी के जरिए धान उठाने की व्यवस्था की थी। वर्ष 2022-23 के सत्र में भी फर्मों ने भारतीय स्टेट बैंक शाखा पेंड्रारोड से 20 करोड़ रुपये की कुल गारंटी में कूट रचना की थी।

राइस मिलों को किया ब्लैकलिस्ट

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन फर्मों ने पूर्व खरीफ वर्ष 2021-22 और वर्तमान 2022-23 के धान खरीदी सत्र में कूट रचित बैंक गारंटी जमा कर अनधिकृत रूप से धान का उठाव किया है। इसी कारण जिला कलेक्टर ने इन राइस मिलों को आगामी सत्रों के लिए ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की है, और उन्हें डीओ जारी नहीं करने का आदेश दिया गया है।

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Author: Deepak Mittal

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